UP BJP Election 2027 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अब उम्मीदवारों के चयन को लेकर सख्त संकेत दे दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लखनऊ दौरे के दौरान साफ संदेश दिया कि यदि किसी नेता का टिकट कट भी जाए तो उसे घर बैठने के बजाय पार्टी को जिताने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनाव में केवल ऐसे उम्मीदवारों को मौका मिलेगा जिनकी जीत की संभावना मजबूत होगी। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि खराब प्रदर्शन, कमजोर जनसंपर्क और नकारात्मक छवि वाले करीब 40 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के टिकट पर खतरा मंडरा सकता है।
चार और पांच जुलाई को लखनऊ में करीब 36 घंटे के प्रवास के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सरकार, संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बैठकों में खास तौर पर उन 240 विधानसभा सीटों की समीक्षा की गई, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था।
UP BJP Election 2027
संगठन स्तर पर पहले से कराए गए सर्वे और फीडबैक के आधार पर छह प्रमुख बिंदुओं पर विधायकों का मूल्यांकन किया जाएगा। इनमें सांसद-विधायक के बीच टकराव, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, क्षेत्र में निष्क्रियता, 70 वर्ष से अधिक आयु, संगठन या सरकार के खिलाफ सार्वजनिक बयान और लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन जैसी बातें शामिल हैं। इसके अलावा बेहद कम अंतर से चुनाव जीतने वाले विधायकों की स्थिति पर भी अलग से विचार किया जाएगा।
नए चेहरों पर रहेगा भरोसा
भाजपा अब शिक्षक और स्नातक खंड विधान परिषद चुनावों में भी नई रणनीति पर काम कर रही है। 11 सीटों में से पांच पर पार्टी ने मौजूदा विजयी उम्मीदवारों को दोबारा मौका दिया है, जबकि बाकी छह सीटों पर नए चेहरों को उतारने की तैयारी है। पार्टी का फोकस ऐसे उम्मीदवारों पर रहेगा जो संगठन में सक्रिय हों और चुनाव जीतने की क्षमता रखते हों। वाराणसी, गोरखपुर-फैजाबाद सहित कई सीटों पर नए समीकरणों के आधार पर उम्मीदवार तय किए जाने की चर्चा है।
दी गई विशेष नसीहत
बैठकों के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन और सरकार के सामने तीन अहम चुनौतियां भी रखीं। पहली, मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम कटने की शिकायतों की समीक्षा कर वास्तविक मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़वाने पर जोर दिया गया। दूसरी, राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे संवेदनशील मामलों पर नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह दी गई, ताकि विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा न मिले। तीसरे, यूजीसी से जुड़े विवादों पर स्थायी समाधान तलाशने की जरूरत बताई गई, क्योंकि अलग-अलग वर्गों में इस मुद्दे को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
एकजुट करने पर जोर
प्रदेश संगठन की नई टीम के गठन के बाद बैठकों में समन्वय की कमी भी सामने आई। इस पर संगठन नेतृत्व ने सभी पदाधिकारियों को आपसी तालमेल मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत लगाने का निर्देश दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन से पूछा कि 2027 में दोबारा पूर्ण बहुमत दिलाने के लिए अब तक क्या प्रयास हुए और किन रणनीतियों में सुधार की आवश्यकता है। बैठक में यह भी तय हुआ कि फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान विधानसभा चुनाव पर रहेगा। इसी वजह से पंचायत चुनाव और कुछ विधानसभा उपचुनाव मुख्य चुनाव के साथ कराने की रणनीति पर भी सहमति बनी, ताकि संगठन की पूरी ऊर्जा विधानसभा चुनाव में केंद्रित रखी जा सके।
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