Kashi Vishwanath Dham : श्री कुमार षष्ठी (स्कंद षष्ठी) के पावन अवसर पर वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम में भगवान कार्तिकेय के विग्रह का विशेष पूजन-अर्चन वैदिक परंपराओं और शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार संपन्न किया गया। इस दौरान मंदिर के विद्वान आचार्यों और शास्त्रियों ने मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक, पूजन और विशेष अनुष्ठान कराए। भगवान को पुष्प, फल, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। पूजन के दौरान समस्त मानव समाज की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति तथा राष्ट्र की प्रगति के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं।
स्कंद षष्ठी को हिंदू धर्म में भगवान कार्तिकेय की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। भगवान कार्तिकेय को भगवान शिव और माता पार्वती का ज्येष्ठ पुत्र तथा देवताओं का सेनापति कहा जाता है।
Kashi Vishwanath Dham
उन्हें स्कंद, कुमार, षण्मुख, सुब्रह्मण्य और मुरुगन जैसे नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से साहस, पराक्रम, तेज और विजय की प्राप्ति होती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। भगवान कार्तिकेय की आराधना विशेष रूप से दक्षिण भारत में अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है। तमिलनाडु सहित कई दक्षिणी राज्यों में उन्हें मुरुगन के नाम से पूजा जाता है। वहां उनके अनेक प्राचीन और भव्य मंदिर स्थित हैं, जहां स्कंद षष्ठी के अवसर पर बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। यह पर्व दक्षिण भारतीय हिंदू समाज की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
व्रत, पूजा-विधि
स्कंद षष्ठी के अवसर पर श्रद्धालु भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की संयुक्त रूप से पूजा करते हैं। मंदिरों में अभिषेक, मंत्रजाप, हवन और विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। भक्त अखंड दीप प्रज्वलित करते हैं और भगवान को भोग अर्पित करते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए सात्विक जीवनशैली, संयम और नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है, जिसमें मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का त्याग शामिल होता है।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार भगवान कार्तिकेय की कृपा से भक्तों को शत्रुओं पर विजय, रोगों से मुक्ति और जीवन की कठिनाइयों से राहत प्राप्त होती है। यह पर्व आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
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