Kanpur News : कानपुर की ऐतिहासिक लाल इमली मिल परिसर में स्थित करीब 105 साल पुराने क्लॉक टावर को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। 128 फुट ऊंचे इस टावर की घड़ी की सुइयां पिछले लगभग 15 दिनों से गायब हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन से लेकर केंद्रीय स्तर तक हलचल बढ़ गई है। यह मामला पहली बार 5 जून को तब सामने आया जब कर्मचारियों ने देखा कि टावर की घड़ी अपने निर्धारित समय को नहीं दर्शा रही है और सुइयां अपनी जगह पर मौजूद नहीं थीं। शुरुआत में मिल प्रबंधन की ओर से इसे प्राकृतिक कारण बताया गया, जिसमें तेज आंधी और तूफान के चलते सुइयों के टूटकर गिरने की आशंका जताई गई।
जैसे-जैसे मामले ने तूल पकड़ा, 16 जून के बाद स्थिति और संदिग्ध हो गई। अब यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई सुइयां किसी प्राकृतिक आपदा का शिकार हुईं या फिर इनके पीछे किसी तरह की चोरी की घटना है।
Kanpur लाल इमली मिल
जांच अधिकारियों के अनुसार अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। प्रारंभिक रिपोर्ट में आंधी-तूफान को कारण माना गया था, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही असली वजह सामने आएगी। इस पूरे मामले ने न केवल मिल प्रशासन बल्कि औद्योगिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लाल इमली कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि परिसर में लगभग 112 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, इसके बावजूद इतनी बड़ी और भारी सुइयों का अचानक गायब हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर चोरी हुई है तो इतने ऊंचे टावर तक कोई कैसे पहुंचा और बिना किसी गतिविधि के सुइयां कैसे निकाल ली गईं। दूसरी ओर, कुछ कर्मचारियों का मानना है कि लंबे समय से रखरखाव न होने के कारण टावर की संरचना कमजोर हो चुकी है, जिससे मौसमीय प्रभाव भी नुकसान का कारण हो सकता है।
वर्तमान स्थिति
यह क्लॉक टावर सिर्फ एक घड़ी नहीं, बल्कि कानपुर के औद्योगिक इतिहास की जीवंत पहचान माना जाता है। 1911 से 1921 के बीच बने इस टावर ने शहर के विकास और कपड़ा उद्योग के सुनहरे दौर को करीब से देखा है। साल 2013 में लाल इमली मिल के बंद होने के बाद से ही इसके रखरखाव को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। देखरेख की कमी और अनदेखी के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है, जिसका यह ताजा मामला एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। मामला अब वस्त्र मंत्रालय तक पहुंच चुका है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि जांच प्रक्रिया तेज होगी और वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह केवल प्राकृतिक क्षति है या फिर किसी बड़ी लापरवाही और संभावित चोरी का मामला। फिलहाल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक और स्पष्ट बयान नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि कानपुर की इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ आखिर क्या हुआ।




