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UP में अब सरकारी स्कूलों में कॉन्वेंट जैसी होगी पढ़ाई, CM कंपोजिट स्कूलों से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था

UP CM Composite School : उत्तर प्रदेश में अब बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों जैसी आधुनिक शिक्षा कम फीस या नाममात्र खर्च में मिलने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार ‘सीएम कंपोजिट स्कूल’ की नई योजना लेकर आई है। बढ़ती प्राइवेट स्कूल फीस से परेशान अभिभावकों को राहत देने के लिए यह मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें सरकारी स्कूलों को पूरी तरह हाईटेक बनाया जाएगा।

इन कंपोजिट स्कूलों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां प्री-प्राइमरी (नर्सरी) से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई एक ही कैंपस में कराई जाएगी। अभी तक प्रदेश में प्राइमरी, जूनियर और इंटरमीडिएट स्कूल अलग-अलग होते हैं, लेकिन इस मॉडल में सभी स्तर की शिक्षा एक ही जगह उपलब्ध होगी। इससे बच्चों को बार-बार स्कूल बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

UP CM Composite School

सरकार की योजना के अनुसार हर जिले में कम से कम दो सीएम कंपोजिट स्कूल खोले जाएंगे। इसके बाद धीरे-धीरे इस मॉडल को ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। इस पूरी योजना के लिए लगभग 4500 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। शुरुआती चरण में 39 जिलों में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक शिक्षण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। विज्ञान के लिए अलग-अलग प्रयोगशालाएं होंगी, जबकि प्राइमरी स्तर पर मॉड्यूलर मैथ और साइंस लैब विकसित की जाएंगी। सीनियर कक्षाओं के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की एडवांस लैब्स भी बनाई जाएंगी।

AI और रोबोटिक्स से जुड़ी शिक्षा भी शामिल

नई शिक्षा नीति के तहत इन स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और कोडिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके लिए विशेष रोबोटिक्स लर्निंग सेंटर बनाए जाएंगे, जहां छात्र आधुनिक तकनीक से जुड़ी स्किल्स सीख सकेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना है। इन स्कूलों में अंग्रेजी और हिंदी के साथ-साथ संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाएं जैसे अवधी, ब्रज, बुंदेलखंडी और भोजपुरी भी सिखाई जाएंगी। ऑडियो-विजुअल तकनीक के जरिए छात्रों की कम्युनिकेशन स्किल और उच्चारण सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे उनका समग्र विकास हो सके।

सुरक्षा और सुविधाओं से लैस

स्कूल कैंपस में CCTV कंट्रोल रूम, मेडिकल रूम और अन्य सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। मेडिकल रूम में प्राथमिक उपचार, ऑक्सीजन सिलेंडर और स्ट्रेचर जैसी सुविधाएं रहेंगी। वहीं करीब 1500 छात्रों की निगरानी के लिए पूरी डिजिटल सिस्टम आधारित सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जाएगी। इन स्कूलों में एडमिशन हर साल मार्च में शुरू होगा और नया सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा। प्रवेश प्रक्रिया लॉटरी या मेरिट के आधार पर होगी। ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकेगा।

फीस और सुविधाएं होंगी बेहद सस्ती

इन स्कूलों में केंद्रीय विद्यालय जैसी फीस संरचना लागू की जा सकती है या फिर नाममात्र शुल्क लिया जाएगा। यूनिफॉर्म, बैग और जूते जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए सरकार DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में सहायता राशि देगी, जिससे अभिभावक बाजार से सामान खरीद सकेंगे। सीएम कंपोजिट स्कूलों का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की छवि बदलना भी है। स्मार्ट शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं के जरिए यह मॉडल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है।

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