UP News : उत्तर प्रदेश सरकार में ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग के राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने रविवार को बरेली पहुंचकर बिजली विभाग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं, राजस्व वसूली और उपभोक्ता सेवाओं की विस्तार से समीक्षा की। बैठक के दौरान मंत्री ने साफ किया कि विभाग की प्राथमिकता बेहतर बिजली व्यवस्था के साथ-साथ जनता का विश्वास बनाए रखना भी है। बैठक में राज्य मंत्री ने वर्ष 2017 से आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों के आचरण पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि यदि कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाता है या आम लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों को गंभीरता से लें और किसी भी स्तर पर अनियमितता को बढ़ावा न दिया जाए।
UP News
मंत्री ने कहा कि बिजली विभाग का लक्ष्य राजस्व संग्रह बढ़ाना जरूर है, लेकिन इसके लिए उपभोक्ताओं को अनावश्यक दबाव या परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता के साथ व्यवहार में संवेदनशीलता और पारदर्शिता बनाए रखें। बिजली से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समीक्षा बैठक में मंत्री ने जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के फोन कॉल को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जनता के फोन कॉल की अनदेखी करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि शिकायत मिलती है कि कोई जिम्मेदार अधिकारी फोन नहीं उठा रहा या समस्या का समाधान नहीं कर रहा, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शी व्यवस्था पर जोर
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है जिसमें जनता को त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनता के प्रति असंवेदनशील रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग के सभी कर्मचारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। बैठक के दौरान मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि बिजली चोरी या अन्य मामलों में होने वाली विजिलेंस जांच अब बिना बॉडी-वॉर्न कैमरे के नहीं की जाएगी। जांच और छापेमारी की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इससे कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ेगी, गलतफहमियों की संभावना कम होगी और जांच प्रक्रिया पर जनता का भरोसा मजबूत होगा।
जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
ऊर्जा विभाग की इस नई व्यवस्था को प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि डिजिटल निगरानी और रिकॉर्डिंग व्यवस्था लागू होने से विवाद कम होंगे और कार्रवाई की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी। वहीं, जनता को भी अपनी शिकायतों के समाधान में अधिक भरोसा मिलेगा।
Read More : Mahayagya Kalash Yatra: गंगा तट से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भरे गए कलश, 15 जून को होगा भंडारे का आयोजन




