Karnataka News : कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रहा सत्ता संघर्ष आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। इस बैठक को राज्य में नए सत्ता समीकरण तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सिद्धारमैया ने नई सरकार और मंत्रिमंडल को लेकर अपनी शर्तें और सुझाव हाईकमान के सामने रखे। चर्चा इस बात की भी रही कि उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अब डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है। संभावना जताई जा रही है कि अगले सप्ताह वे नए मंत्रिमंडल के साथ शपथ ले सकते हैं। नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए चार डिप्टी सीएम भी बनाए जाने पर चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि नई कैबिनेट में सिद्धारमैया गुट का प्रभाव बना रहेगा। कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह नए चेहरों को मौका मिलेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे का नाम भी डिप्टी सीएम पद की दौड़ में सामने आ रहा है।
दिल्ली में चली लंबी राजनीतिक बातचीत
दिल्ली में हुई बैठकों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया अपने समर्थक विधायकों और करीबी नेताओं को नई सरकार में मजबूत हिस्सेदारी दिलाना चाहते हैं। यही वजह है कि इस्तीफे के तुरंत बाद उन्होंने दिल्ली पहुंचकर हाईकमान से बातचीत की। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में किसी भी तरह की टूट या असंतोष की स्थिति नहीं चाहता। इसलिए सत्ता परिवर्तन को संतुलित तरीके से लागू करने की कोशिश की जा रही है, ताकि दोनों बड़े गुट साथ बने रहें।
ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले की फिर चर्चा
कर्नाटक में 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने में सात दिन लग गए थे। उसी दौरान यह चर्चा शुरू हुई थी कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का फॉर्मूला तय हुआ है।कांग्रेस ने कभी आधिकारिक तौर पर इस समझौते को स्वीकार नहीं किया, लेकिन अब सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है। पिछले तीन दिनों में दिल्ली में लगातार बैठकों और बातचीत के बाद आखिरकार नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ होता नजर आया।
वाल्मीकि घोटाले के बाद बढ़ा दबाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले और सरकार के खिलाफ बढ़ती नाराजगी ने कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बढ़ाया। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि समय रहते बदलाव कर एंटी-इंकम्बेंसी को कम किया जाए। इसी रणनीति के तहत नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लिया गया, ताकि आगामी चुनावों से पहले पार्टी की छवि को मजबूत किया जा सके।
कर्नाटक के संभावित नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाते हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनके पास 1400 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। वे रियल एस्टेट, होटल और खनन कारोबार से जुड़े रहे हैं। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच भी चल चुकी है। साल 2019 में आयकर और ईडी की कार्रवाई के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में भी समय बिताना पड़ा था। बावजूद इसके, कांग्रेस संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है और संकट के समय पार्टी उन्हें भरोसेमंद रणनीतिकार के रूप में देखती है।
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