China : भारत के चावल निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है, जब चीन ने भारतीय चावल की कुछ खेपों को यह कहते हुए वापस भेज दिया कि उनमें जेनेटिकली मॉडिफाइड (GMO) तत्व पाए गए हैं। इस फैसले से न केवल निर्यातकों की चिंता बढ़ी है, बल्कि किसानों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तरह की आपत्ति भारत की छवि पर भी सवाल खड़े कर सकती है।
निर्यातकों का कहना है कि जिन शिपमेंट्स को लौटाया गया, वे सभी जरूरी परीक्षणों और औपचारिक मंजूरी के बाद ही भेजे गए थे। भारत से रवाना होने से पहले इन खेपों की गुणवत्ता जांच की गई थी और संबंधित एजेंसियों ने इन्हें क्लियर किया था। बावजूद इसके चीन द्वारा अचानक इन्हें खारिज कर देना व्यापारियों के लिए हैरानी भरा कदम माना जा रहा है।
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इस मामले को लेकर The Rice Exporters Association of Chhattisgarh ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि निर्यातक सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हैं और लैब टेस्ट के बाद ही माल विदेश भेजा जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले से न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और देरी के कारण भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि भविष्य के ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देशों में अग्रणी है। ऐसे में यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो अन्य देश भी इसी तरह के आरोप लगाकर भारतीय चावल पर सवाल उठा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति को जल्द सुलझाना जरूरी है, ताकि वैश्विक बाजार में भारत की विश्वसनीयता बनी रहे।
ICAR ने किया साफ इनकार
इस पूरे मामले पर Indian Council of Agricultural Research ने स्पष्ट किया है कि भारत में व्यावसायिक स्तर पर GMO चावल की खेती की अनुमति नहीं है। संस्थान के मुताबिक देश से निर्यात होने वाला पूरा चावल नॉन-GMO है और वर्तमान में इस क्षेत्र में कोई सक्रिय शोध कार्यक्रम भी नहीं चल रहा है। ऐसे में चीन के दावे पर अब सवाल उठने लगे हैं और दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की जरूरत महसूस की जा रही है।
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