US-Iran : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के बजाय और उलझता नजर आ रहा है। सीजफायर की डेडलाइन करीब है, लेकिन दोनों देशों के बीच सहमति बनती नहीं दिख रही। पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर भी संशय बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान के साथ समझौते को लेकर उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार जिस नई डील पर काम कर रही है, वह पहले हुए समझौते से कहीं बेहतर होगी। ट्रंप का कहना है कि यह डील अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
US-Iran तनाव बरकरार
ट्रंप ने पुराने परमाणु समझौते JCPOA को लेकर भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह डील बराक ओबामा और जो बाइडेन के कार्यकाल में बनी थी, जो अमेरिका के लिए बेहद खराब साबित हो सकती थी। उनके मुताबिक, इस समझौते ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने का रास्ता दे दिया था। ट्रंप ने एक बार फिर उस विवादित रकम का जिक्र किया, जिसमें ईरान को करीब 1.7 अरब डॉलर नकद दिए जाने की बात कही गई थी। उनका दावा है कि यह पैसा Boeing 757 विमान के जरिए भेजा गया था। उन्होंने कहा कि उस समय अमेरिका के कई बैंकों से बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई, जो बेहद असामान्य कदम था।
नई डील से होगा फायदा
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि अगर उनकी अगुवाई में नई डील होती है, तो इससे सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि इजरायल, यूरोप और पूरे मिडिल ईस्ट को फायदा होगा। ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता शांति और सुरक्षा की गारंटी देगा और दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश होगा। ट्रंप ने इस मुद्दे पर अमेरिकी मीडिया को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने कुछ पत्रकारों पर ‘फेक न्यूज’ फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि पुराने समझौते की सच्चाई को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। उनके मुताबिक, मीडिया को देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई नई डील हो पाएगी या नहीं। शांति वार्ता पर बने संशय के बीच आने वाले दिन काफी अहम माने जा रहे हैं। अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।
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