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Lifestyle: आप भी तेज सिरदर्द या माइग्रेन से रहते हैं परेशान, तो पढ़ें ये जरूरी जानकारी; जानें कैसे ट्रिगर होता है माइग्रेन?

Headache
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Lifestyle News : आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग ऑफिस, घर और दोस्तों के बीच लगातार भाग-दौड़ में लगे रहते हैं। ऐसे में तनाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या आम बात हो गई है। इसी के साथ एक और परेशानी तेजी से बढ़ रही है, वह माइग्रेन है। कई लोग बार-बार होने वाले तेज सिरदर्द से जूझ रहे हैं, लेकिन अब इसके पीछे एक और बड़ा कारण वायु प्रदूषण सामने आया है। हाल ही में एक स्टडी में पाया गया है कि हवा में बढ़ता प्रदूषण माइग्रेन के खतरे को काफी बढ़ा सकता है। यह शोध प्रतिष्ठित Neurology जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि चाहे प्रदूषण का असर कम समय के लिए हो या लंबे समय तक… दोनों ही स्थितियों में यह सिरदर्द को बढ़ाने का काम करता है।

दुनिया की स्वास्थ्य एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों या दिल के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है।

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WHO के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कण शरीर में सूजन और तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकते हैं, जिससे सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस अध्ययन को बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव के वैज्ञानिकों ने किया है। रिसर्च में सामने आया कि माइग्रेन सिर्फ शरीर की आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि बाहरी वातावरण भी इसे प्रभावित करता है। गर्मी, नमी और हवा की गुणवत्ता जैसे कारक इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

कैसे ट्रिगर होता है माइग्रेन?

शोध के प्रमुख वैज्ञानिक इडो पेलेस के अनुसार, पर्यावरण दो तरह से माइग्रेन को प्रभावित करता है। पहला, मौसम के बदलाव जैसे ज्यादा गर्मी या नमी माइग्रेन के खतरे को बढ़ा या घटा सकते हैं। दूसरा, प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ना सीधे माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है, जिससे तेज दर्द शुरू हो जाता है। यह रिसर्च काफी बड़े स्तर पर की गई थी। इसमें 7,000 से ज्यादा लोगों को करीब 10 साल तक ट्रैक किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि ये लोग रोजाना कितने प्रदूषण के संपर्क में आते हैं और मौसम का उन पर क्या असर पड़ता है।

अस्पताल के डेटा से मिला सबूत

स्टडी के दौरान उन मामलों का भी विश्लेषण किया गया, जब लोगों को तेज माइग्रेन के कारण अस्पताल जाना पड़ा। इस डेटा से यह साफ हुआ कि जिन दिनों प्रदूषण ज्यादा था, उन दिनों माइग्रेन के केस भी बढ़े हुए थे। इससे दोनों के बीच मजबूत संबंध साबित हुआ। रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन लोगों को पहले से माइग्रेन की समस्या है, वे प्रदूषण के असर के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं यानी ऐसे लोगों में हल्का प्रदूषण भी तेज सिरदर्द का कारण बन सकता है।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन से बचने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं। जैसे ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में बाहर निकलने से बचें, मास्क का इस्तेमाल करें, पर्याप्त पानी पिएं और नियमित नींद लें। इसके अलावा, घर के अंदर साफ हवा बनाए रखना भी जरूरी है। माइग्रेन सिर्फ तनाव या थकान का नतीजा नहीं है, बल्कि हमारे आसपास का वातावरण भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। बढ़ते प्रदूषण के बीच सतर्क रहना और अपनी सेहत का ध्यान रखना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

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