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MP का रहस्यमयी किला, जहां आज भी अश्वत्थामा के आने की मान्यता; जानें इसकी अन्य खासियत

Fort Kila
Fort Kila

MP Fort : मध्य प्रदेश अपने ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ रहस्यमयी जगहों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक है असीरगढ़ किला, जो अपने इतिहास के साथ-साथ अनोखी मान्यताओं के कारण चर्चा में रहता है। यह किला न सिर्फ अपनी बनावट के लिए खास है, बल्कि इससे जुड़ी कहानियां भी लोगों को हैरान कर देती हैं। यह किला बुरहानपुर जिले में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला पर करीब 250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर मौजूद यह किला दूर से ही अपनी भव्यता का अहसास करा देता है।

असीरगढ़ किले की सबसे खास बात इसकी संरचना है। यह किला तीन भागों में बंटा हुआ है, जिसमें ऊपरी हिस्सा असीरगढ़, बीच का कामरगढ़ और नीचे का मलयगढ़ शामिल है। इस तरह की बनावट इसे रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत बनाती थी, जिससे दुश्मनों के लिए इसे जीतना आसान नहीं था।

MP का रहस्यमयी किला

इस किले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उस मान्यता की होती है, जिसमें कहा जाता है कि अश्वत्थामा आज भी यहां आते हैं। लोगों का विश्वास है कि वह अमावस्या और पूर्णिमा के दिन किले में स्थित गुप्तेश्वर मंदिर में भगवान शिव की पूजा करते हैं। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इतिहासकारों के अनुसार, किले का निर्माण मध्यकालीन दौर में हुआ था और इसका नाम भी एक दिलचस्प कहानी से जुड़ा है। कहा जाता है कि यहां कभी आशा अहीर नाम का व्यक्ति रहता था, जिसने अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए दीवारें बनाईं थीं। उसी के नाम पर इस जगह को असीरगढ़ कहा जाने लगा।

महाभारत से जुड़ा कनेक्शन

अश्वत्थामा, द्रोणाचार्य के पुत्र थे, जिन्हें श्रीकृष्ण ने अमर रहने का श्राप दिया था। मान्यता है कि वह आज भी पृथ्वी पर भटक रहे हैं और असीरगढ़ किला उनके ठहरने की जगहों में से एक है। यही वजह है कि यह किला धार्मिक और रहस्यमयी दोनों नजरियों से खास माना जाता है। करीब 60 एकड़ में फैले इस किले में पांच तालाब हैं, जो कभी नहीं सूखते। इसके अलावा यहां गंगा और यमुना नाम के दो कुंड भी मौजूद हैं। कहा जाता है कि पुराने समय में दुश्मनों को हराकर इन्हीं कुंडों में डाला जाता था। किले में मंदिर और मस्जिद दोनों मौजूद हैं, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।

अकबर से जुड़ा इतिहास

जब यह किला अपनी मजबूती और प्रसिद्धि के लिए जाना जाने लगा, तो इसकी खबर अकबर तक भी पहुंची। उस समय यह किला बहादुरशाह फारूखी के अधीन था। मुगल शासन के दौरान इस किले को जीतने के लिए कई प्रयास किए गए, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया। असीरगढ़ किला सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि रहस्य, इतिहास और मान्यताओं का संगम है। यहां की ऊंचाई, प्राकृतिक सुंदरता और पुरानी कहानियां इसे खास बनाती हैं।

असीरगढ़ किला मध्य प्रदेश के उन खास स्थानों में शामिल है, जहां इतिहास और रहस्य एक साथ नजर आते हैं। अगर आप रोमांच और इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

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