MP News : मध्य प्रदेश की विंध्याचल पहाड़ियों के बीच से गुजरने वाला महू-कालाकुंड रेल मार्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए खास पहचान रखता है। महू (डॉ. अंबेडकर नगर) से शुरू होकर कालाकुंड तक जाने वाली यह हेरिटेज ट्रेन यात्रियों को एक अलग ही अनुभव देती है। घुमावदार पटरियों पर धीरे-धीरे चलती ट्रेन के बाहर दिखने वाले नजारे किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगते।
यह सफर लोगों को दार्जिलिंग और शिमला की टॉय ट्रेन की याद दिलाता है। चारों तरफ घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और गहरी घाटियां इस यात्रा को बेहद खास बनाते हैं। छोटे-छोटे स्टेशन, शांत माहौल और ठंडी हवाएं इस सफर को और सुकूनभरा बना देती हैं।
MP की एकमात्र हेरिटेज ट्रेन
इस ट्रैक की खासियत यह है कि यह ब्रिटिश काल में बनाया गया था। रास्ते में आने वाली पुरानी सुरंगें और ऊंचे पुल यात्रियों को पुराने समय का एहसास कराते हैं। जैसे गोवा के रास्ते में दूधसागर जलप्रपात दिखता है, वैसे ही इस रूट पर भी कई खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। मध्य प्रदेश की यह एकमात्र हेरिटेज ट्रेन मानसून के मौसम में चलाई जाती है। पातालपानी और कालाकुंड के बीच चलने वाली यह ट्रेन खासतौर पर वीकेंड पर संचालित होती है। बारिश के मौसम में हरियाली, झरने और ठंडी हवाएं इस सफर को और भी यादगार बना देती हैं।
रास्ते में दिखते हैं अद्भुत नजारे
इस खूबसूरत सफर की सबसे खास बात इसकी कीमत है। यात्री सिर्फ 20 रुपये में इस शानदार यात्रा का आनंद ले सकते हैं। यही वजह है कि यह देश की सबसे सस्ती और खूबसूरत ट्रेन यात्राओं में गिनी जाती है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक पर ट्रेन चार सुरंगों, एक घाटी पुल और गहरी खाइयों से होकर गुजरती है। हर मोड़ पर नया दृश्य देखने को मिलता है। सफर की शुरुआत में ही पातालपानी झरना नजर आता है, जो मानसून में अपने पूरे शबाब पर होता है।
ठहराव
इस यात्रा के दौरान ट्रेन तांत्या भील व्यूप्वाइंट जैसे खास स्थानों पर भी रुकती है। यहां यात्री कुछ समय के लिए उतरकर फोटो ले सकते हैं और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद उठा सकते हैं। इस हेरिटेज ट्रेन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पिछले साल करीब 50,000 से ज्यादा पर्यटकों ने इस सफर का आनंद लिया। ट्रेन की डिमांड इतनी ज्यादा है कि इसका संचालन शुरू होते ही एडवांस बुकिंग फुल हो जाती है।
ऐतिहासिक महत्व
महू से कालाकुंड तक का यह रेल ट्रैक साल 1877 में बनाया गया था। एक समय इसे बंद करने की योजना भी बनी थी, लेकिन इसकी खूबसूरती और पर्यटन महत्व को देखते हुए इसे बचा लिया गया। साल 2018 में इसे आधिकारिक तौर पर हेरिटेज ट्रैक घोषित किया गया। यह ट्रेन यात्रा सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब ले जाने वाला खास अनुभव है। जो लोग शांति, हरियाली और पहाड़ों के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह सफर किसी जन्नत से कम नहीं है।
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