Delimitation Bill : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने विरोध जताते हुए बिल की कॉपी जलाई और इसे राज्य के अधिकारों पर हमला बताया। स्टालिन का यह कदम सीधे तौर पर केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है। स्टालिन ने पूरे तमिलनाडु में विरोध को मजबूत करने के लिए काला झंडा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। राज्य के कई हिस्सों में लोगों ने उनके आह्वान पर काले झंडे फहराकर विरोध दर्ज कराया।
स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि परिसीमन के खिलाफ विरोध पूरे तमिलनाडु में फैलना चाहिए।
Delimitation Bill पर सियासी संग्राम
यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक इस फैसले को वापस नहीं लिया जाता। अपने बयान में स्टालिन ने इस विधेयक को ‘काला कानून’ करार दिया। उनका कहना है कि यह बिल तमिल लोगों को उनकी ही जमीन पर कमजोर कर देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विरोध सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैल सकता है। मुख्यमंत्री ने विरोध के प्रतीक के तौर पर काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के खिलाफ था, जिसमें परिसीमन का प्रस्ताव रखा गया है। इस बिल के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्गठन की बात कही जा रही है।
नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन
स्टालिन के आह्वान के बाद राज्य के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी विरोध तेज कर दिया है। तिरुचिरापल्ली में मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी के घर पर काले झंडे लगाए गए। इसे राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत माना जा रहा है, जिसमें आम लोग भी धीरे-धीरे शामिल हो रहे हैं। परिसीमन विधेयक को लेकर विरोध सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। विपक्षी दल लगातार इस पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार जल्दबाजी में फैसले ले रही है और राज्यों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।
महिला आरक्षण से जुड़ा मामला
यह पूरा विवाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। सरकार का कहना है कि परिसीमन के बिना महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल होगा, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है। परिसीमन विधेयक को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ केंद्र इसे जरूरी सुधार बता रहा है, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु समेत कई राज्यों में इसका विरोध बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।
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