Parliament Special Session : संसद के विशेष सत्र में सरकार ने तीन अहम विधेयक पेश किए, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बजट सत्र को आगे बढ़ाते हुए बुलाए गए इस सत्र में संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े बिल शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इनका मकसद महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की प्रक्रिया को तेज करना है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पेश किए।
इन बिलों का सीधा संबंध महिला आरक्षण कानून को लागू करने और नई सीटों के निर्धारण से जोड़ा जा रहा है। सरकार ने साफ किया है कि ये विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जमीन पर लागू करने की दिशा में अगला कदम हैं।
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इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने का रास्ता साफ किया जाएगा। इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया को भी जरूरी बताया गया है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने इन विधेयकों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब महिला आरक्षण कानून पहले ही पास हो चुका है, तो उसमें बदलाव की जरूरत क्यों पड़ रही है। साथ ही परिसीमन आयोग के गठन को लेकर भी उन्होंने इसे असंवैधानिक करार दिया।
रेणुका चौधरी का तीखा हमला
महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इस मुद्दे पर मौजूदा महिला सांसदों से कोई चर्चा नहीं की गई और न ही उन्हें विश्वास में लिया गया। सदन में गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अखिलेश यादव ने बिल से पहले जाति जनगणना की मांग उठाई, जिस पर शाह ने जवाब दिया कि सरकार पहले ही इसका फैसला कर चुकी है और प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
धर्म आधारित आरक्षण पर विवाद
बहस के दौरान अमित शाह ने साफ कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष के कुछ नेताओं के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह की मांगें देश के कानून के दायरे में नहीं आतीं और सरकार इस पर स्पष्ट रुख रखती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन को संबोधित करने की चर्चा भी तेज रही। माना जा रहा है कि सरकार इन विधेयकों को लेकर अपना पक्ष विस्तार से रख सकती है, जिससे आगे की रणनीति साफ होगी।
महिला आरक्षण को लागू करने के नाम पर पेश किए गए इन विधेयकों ने संसद में सियासी घमासान खड़ा कर दिया है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रक्रिया और मंशा दोनों पर सवाल उठाते हुए घेर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने के संकेत दे रहा है।
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