Sonia Gandhi : केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित परिसीमन को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि परिसीमन जैसे बड़े फैसले से पहले जनगणना कराना बेहद जरूरी है और पूरी प्रक्रिया राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होनी चाहिए। सोनिया गांधी ने अपने बयान में कहा कि बिना जनगणना के परिसीमन करना उचित नहीं होगा।
उनका मानना है कि देश की वास्तविक आबादी के आंकड़े सामने आने के बाद ही सीटों के पुनर्निर्धारण पर फैसला लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है।
Sonia Gandhi का सरकार पर हमला
उन्होंने यह भी कहा कि जो राज्य परिवार नियोजन में आगे रहे हैं या जिनकी आबादी कम है, उन्हें किसी भी तरह नुकसान नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर सिर्फ जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा किया गया, तो छोटे और विकसित राज्यों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा पहले ही तय हो चुका है। उन्होंने कहा कि असली चिंता परिसीमन को लेकर है, क्योंकि यह देश के राजनीतिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने इसे संविधान से जुड़ा गंभीर विषय बताया और कहा कि इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
इन महिलाओं के लिए उप-कोटा की मांग
उन्होंने महिलाओं के लिए ओबीसी उप-कोटा की मांग भी दोहराई। इस दौरान उन्होंने Mallikarjun Kharge का जिक्र करते हुए कहा कि 2023 में ‘नारी वंदन अधिनियम’ के समय भी यह मुद्दा उठाया गया था। उनका कहना है कि महिलाओं को आरक्षण के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी मिलना चाहिए। सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार कठिन समय में अपनी छवि सुधारने के लिए ऐसे मुद्दों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि इस पर व्यापक चर्चा जरूरी है।
CPP चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी ने अपने लेख में साफ लिखा है कि परिसीमन कोई अंकगणित नहीं है।
⦿ परिसीमन राजनीतिक रूप से समान और निष्पक्ष होना चाहिए
परिसीमन के जरिए छोटे राज्यों को तुलनात्मक रूप से कोई नुकसान नहीं होना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार जनगणना के आंकड़ों के बिना जो… pic.twitter.com/YalBwYZGUU
— Congress (@INCIndia) April 13, 2026
सर्वदलीय बैठक की दी सलाह
उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को साथ बैठाकर चर्चा की जानी चाहिए। सोनिया गांधी ने कहा कि 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है और जुलाई में होने वाले मानसून सत्र में इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। इस बीच कांग्रेस ने अपने सभी लोकसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। इसमें सांसदों को संसद के विशेष सत्र के दौरान अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को संसद के अंदर और बाहर जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
परिसीमन को लेकर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ने के आसार हैं। अब देखना होगा कि इस संवेदनशील विषय पर आगे क्या रास्ता निकलता है।
Read More : Uttarakhand कांग्रेस: हरीश रावत और कुमारी सैलजा की मुलाकात




