Pakistan : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान का रुख चर्चा में है। एक तरफ वह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए शांति वार्ता की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने अपने सैनिक और लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेज दिए हैं। इस कदम को लेकर पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने करीब 13,000 सैनिकों के साथ 10 से 18 लड़ाकू विमान सऊदी अरब में तैनात किए हैं।
बता दें कि यह तैनाती ऐसे समय में की गई है, जब क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। इससे पाकिस्तान के दोहरे रुख की चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रणनीतिक रक्षा समझौता हुआ था।
Pakistan का दोहरा रुख!
इस समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी समझौते के तहत पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत सऊदी अरब भेजी है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य दल को अब्दुल अजीज एयरबेस के पूर्वी क्षेत्र में तैनात किया गया है। इस तैनाती का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करना बताया गया है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी गतिविधि
मौजूदा हालात में ईरान की ओर से सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी एयरबेसों को निशाना बनाने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान की आक्रामकता बढ़ी है। ऐसे में सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। एक पाकिस्तानी सरकारी अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि यह तैनाती दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते के तहत की गई है। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान के सैनिक और लड़ाकू विमान सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए वहां मौजूद हैं और उनका मकसद किसी आक्रामक कार्रवाई में शामिल होना नहीं है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी के अनुसार, पाकिस्तान ने यह तैनाती पिछले महीने ही कर दी थी, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों का उद्देश्य केवल सऊदी अरब की रक्षा करना है, न कि किसी युद्ध में हिस्सा लेना। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने सऊदी अरब को मिसाइल इंटरसेप्टर्स भी मुहैया कराए हैं। यह कदम उस समय उठाया गया, जब ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया था। इससे साफ है कि पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।
दोहरी रणनीति पर उठे सवाल
एक ओर पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर उसकी सैन्य सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान एक साथ दोनों भूमिकाएं निभा सकता है। आने वाले दिनों में इस रणनीति के असर पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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