Success Story : आज के समय में शॉपिंग करना हर किसी की जरूरत बन गया है। अगर उस पर अच्छा-खासा डिस्काउंट मिल जाए, तो लोग बिना सोचे खरीदारी कर लेते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि डिस्काउंट का यह आइडिया कहां से आया और किसने इसे शुरू किया। डिस्काउंट की यह सोच किसी बड़े कारोबारी घराने से नहीं, बल्कि एक साधारण लड़के से आई थी। यह कहानी है सैम वॉल्टन की, जिन्होंने अपनी समझ और मेहनत के दम पर खरीदारी की दुनिया ही बदल दी।
सैम वॉल्टन ने बचपन में आर्थिक तंगी का सामना किया। उन्होंने खेतों में काम किया और घर-घर अखबार बांटकर पैसे कमाए। इसी दौरान उन्होंने समझा कि आम लोग कम कीमत में अच्छी चीजें चाहते हैं।
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आगे चलकर उन्होंने जे.सी. पेनी में नौकरी कर रिटेल बिजनेस की बारीकियां सीखी। सेना में सेवा देने के बाद सैम ने एक छोटा स्टोर खरीदा और अपने बिजनेस की शुरुआत की। उन्होंने बड़े शहरों की बजाय छोटे कस्बों को चुना। उनका मानना था कि यहां भी लोग अच्छी क्वालिटी का सामान चाहते हैं, लेकिन सस्ती कीमत पर। 2 जुलाई 1962 को सैम ने वॉलमार्ट का पहला स्टोर खोला। उन्होंने ‘हर दिन कम कीमत’ का फॉर्मूला अपनाया। यानी कम मुनाफा लेकर ज्यादा सामान बेचना। इस रणनीति ने ग्राहकों को उनकी ओर खींचा और बिजनेस तेजी से बढ़ा।
कीमत पर खास फोकस
सैम ने बिचौलियों को हटाकर सीधे कंपनियों से सामान खरीदना शुरू किया। इससे लागत कम हुई और ग्राहकों को सस्ता सामान मिल सका। साथ ही उन्होंने ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत किया, जिससे डिलीवरी खर्च भी कम हुआ। सैम वॉल्टन की सबसे बड़ी ताकत उनके कर्मचारी थे। वह उन्हें ‘पार्टनर’ मानते थे और कंपनी के मुनाफे में हिस्सा देते थे। यही वजह रही कि उनकी टीम पूरी लगन से काम करती थी और कंपनी को नई ऊंचाइयों तक ले गई।
सैम वॉल्टन ने साबित कर दिया कि कम कीमत पर ज्यादा बिक्री करके भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। आज उनका यह मॉडल पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है और डिस्काउंट शॉपिंग हर ग्राहक की पहली पसंद बन चुकी है।
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