UP Politics : उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच नैरेटिव की लड़ाई तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ही अपने-अपने तरीके से मुद्दों को साधने में जुटे हैं। इसी कड़ी में योगी सरकार का हालिया फैसला चर्चा में है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में एकमुश्त 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। अब यह 18 हजार रुपये प्रतिमाह हो गया है। इसे भाजपा की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके जरिए वह शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े वर्ग को अपने पक्ष में लाना चाहती है।
इस फैसले के बाद सपा ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी इस मुद्दे को ‘राहत बनाम हक’ के रूप में पेश कर रही है। सपा का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत है, जबकि स्थायी समाधान और अधिकार अभी भी अधूरे हैं।
UP में गरमाई सियासत
शिक्षामित्रों का मुद्दा लंबे समय से राजनीति में अहम रहा है। 1999 में कल्याण सिंह सरकार ने इनकी नियुक्ति की थी। बाद में मुलायम सिंह यादव और मायावती सरकारों ने मानदेय बढ़ाया। अखिलेश यादव सरकार में इन्हें सहायक शिक्षक बनाया गया, लेकिन 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह व्यवस्था खत्म हो गई। राज्य में करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र हैं, जो खुद के साथ अपने परिवार और समाज पर भी असर डालते हैं। भाजपा इस फैसले के जरिए इस बड़े वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। साथ ही सपा के शिक्षा से जुड़े आरोपों को कमजोर करने का भी प्रयास है।
अनुदेशकों को ₹17,000 तथा शिक्षामित्रों को ₹18,000 का मानदेय इसी महीने से हम लागू करने जा रहे हैं… pic.twitter.com/daT4qQnCnO
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 4, 2026
सपा का पलटवार जारी
सपा इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है। पार्टी ने अपने संगठन और शिक्षक सभा को सक्रिय कर दिया है। अखिलेश यादव ने हाल ही में शिक्षामित्रों को संदेश देकर यह याद दिलाने की कोशिश की कि उनकी सरकार में ही उन्हें बड़ा फायदा मिला था। अब यह मुद्दा सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें सम्मान, स्थायित्व और भरोसे की बात भी जुड़ गई है। आने वाले समय में यही तय करेगा कि शिक्षामित्र किस राजनीतिक दल के साथ खड़े होते हैं और इसका असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ सकता है।
प्रिय शिक्षामित्रों,
हमारे समय में आपको 40000 मिलता था और 9 साल की प्रताड़ना के बाद, शिक्षामित्रों की एकता, एकजुटता और रोष से डरकर भाजपा सरकार ने एहसान दिखाते हुए पैसे बढ़ाए भी तो केवल 18000, वो भी हार के डर से। अगर भाजपा सच में हितैषी है तो पिछले सालों का बकाया भी दे।
भाजपा…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 8, 2026
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