Iran News : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में जमीन पर सैनिक उतारने की “शायद जरूरत न पड़े”, लेकिन इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले और सैनिकों की मौत का जिक्र करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि इसका जवाब जल्द दिया जाएगा। उनके इस बयान को पिछले दावे से अलग माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अन्य राष्ट्रपतियों की तरह “जमीन पर सेना नहीं भेजेंगे” जैसा वादा नहीं करते।
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव अब खुले टकराव में बदल चुका है। सोमवार को हालात और बिगड़ गए जब तेहरान समर्थित मिलिशिया समूह भी सक्रिय हो गए। इससे लड़ाई केवल दो देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में हमलों की श्रृंखला शुरू हो गई।
Iran ने दागी मिसाइलें
अलग-अलग मोर्चों पर मिसाइल, ड्रोन और रॉकेट दागे जा रहे हैं, जिससे हालात बेहद विस्फोटक बने हुए हैं। ईरान ने सीधे इजराइल के साथ-साथ कुछ अरब देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। उधर लेबनान में सक्रिय संगठन Hezbollah ने उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट और ड्रोन से हमला किया। जवाब में Israel ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों और दक्षिणी लेबनान में जबरदस्त हवाई कार्रवाई की। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है। इजराइली सरकार ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
खामनेई की मौत के बाद भड़की आग
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में हाल ही में हुए अमेरिकी-इजराइली हमले बताए जा रहे हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई। इस घटना ने ईरान में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार 131 शहरों में अब तक कम से कम 555 लोगों की जान जा चुकी है। तेहरान का कहना है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।
तेहरान का सख्त रुख
तनाव के बीच अमेरिका की ओर से बातचीत के संकेत दिए गए, लेकिन ईरान ने साफ इनकार कर दिया। वरिष्ठ नेता Ali Larijani ने कहा कि मौजूदा हालात में वॉशिंगटन से किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है। उनका कहना है कि पहले हमले रोके जाएं, तभी आगे की बात होगी। इस बयान से साफ है कि फिलहाल कूटनीतिक रास्ता बंद नजर आ रहा है।
तेल बाजार में हलचल
इस जंग का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। ईरानी ड्रोन ने सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी को निशाना बनाया, जहां रोजाना पांच लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल प्रोसेस होता है। हमले के कारण कुछ समय के लिए उत्पादन बाधित रहा। साथ ही Strait of Hormuz के आसपास बढ़ती धमकियों ने तेल सप्लाई को लेकर चिंता और गहरा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रास्ता बाधित हुआ तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।
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