India News : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने आखिरकार अपनी गलती स्वीकार कर ली है। भारत सरकार के साथ हुई बातचीत में कंपनी ने माना कि उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में गंभीर खामियां थीं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, एक्स ने भरोसा दिलाया है कि वह आगे पूरी तरह भारतीय कानून और नियमों के तहत ही काम करेगा। इस स्वीकारोक्ति के बाद प्लेटफॉर्म पर बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है।
सरकारी हस्तक्षेप के बाद एक्स ने करीब 3,500 आपत्तिजनक और अश्लील पोस्ट को ब्लॉक किया है। इसके साथ ही 600 से अधिक ऐसे अकाउंट्स को पूरी तरह डिलीट कर दिया गया है, जो लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आगे भी निगरानी जारी रहेगी।
ग्रोक एआई बना विवाद की जड़
पूरा मामला तब तूल पकड़ गया, जब यह सामने आया कि एक्स के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ‘ग्रोक’ के जरिए अश्लील और यौन रूप से आपत्तिजनक सामग्री बनाई या फैलायी जा रही है। खासतौर पर महिलाओं से जुड़ी अशोभनीय तस्वीरों और कंटेंट को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया। इसे डिजिटल स्पेस में महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया गया।
India में सरकार ने मांगा था जवाब
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक्स से साफ पूछा था कि ग्रोक एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए कंपनी क्या ठोस कदम उठा रही है। एक्स ने जवाब तो भेजा, लेकिन उसमें कई अहम जानकारियां नहीं थीं। इसके बाद सरकार ने दोबारा निर्देश दिए कि एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल यौन और अश्लील कंटेंट बनाने में किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए।
बदली नीति
नए घटनाक्रम के तहत, एक्स ने आश्वासन दिया है कि आगे प्लेटफॉर्म पर अश्लील तस्वीरों और सामग्री को अनुमति नहीं दी जाएगी। कंपनी का कहना है कि कंटेंट फिल्टरिंग और मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि इस तरह की चूक दोबारा न हो।
राजनीतिक हलकों में भी उठे सवाल
इस बीच राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रोक एआई से आपत्तिजनक और यौन कंटेंट बनाने पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय इसे सिर्फ पेड यूजर्स तक सीमित कर देना पर्याप्त कदम नहीं है। उनके मुताबिक, यह समस्या का आधा-अधूरा समाधान है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ी सख्ती
इस कार्रवाई के बाद साफ हो गया है कि भारत सरकार सोशल मीडिया और एआई टूल्स के दुरुपयोग को लेकर अब किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नियम और सख्त हो सकते हैं।
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