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PM Narendra Modi ने जॉर्डन में बिजनेस मीट को किया संबोधित, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

PM Narendra Modi
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PM Narendra Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों तीन देशों के चार दिवसीय विदेश दौरे पर हैं। इस यात्रा का पहला पड़ाव जॉर्डन रहा, जहां उन्होंने भारत-जॉर्डन बिजनेस मीट को संबोधित किया। अपने भाषण में पीएम मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों, भविष्य की संभावनाओं और व्यापारिक सहयोग पर खुलकर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जॉर्डन का रिश्ता सिर्फ सीमाओं या बाजारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कई देशों के साथ या तो सीमा मिलती है या बाजार, लेकिन भारत और जॉर्डन के बीच रिश्ता विश्वास और भविष्य के मौके दोनों को जोड़ता है।

बता दें कि पीएम मोदी के मुताबिक, यह रिश्ता इतिहास से मजबूत रहा है और आने वाले समय में आर्थिक रूप से और मजबूत हो सकता है। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत और जॉर्डन की साझेदारी आने वाले वर्षों में व्यापार, विकास, संस्कृति और आपसी विश्वास की एक मजबूत मिसाल बनेगी।

दोनों देशों को फायदा: PM Narendra Modi

पीएम मोदी ने जॉर्डन के राजा के साथ हुई अपनी बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच इस बात पर चर्चा हुई कि किस तरह भूगोल को अवसर में बदला जाए और उन अवसरों से विकास को आगे बढ़ाया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जॉर्डन आज एक ऐसा सेतु बन चुका है, जो अलग-अलग क्षेत्रों और देशों के बीच सहयोग को आसान बनाता है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से अपील की कि वे जॉर्डन के जरिए अमेरिका, कनाडा और दूसरे बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने के मौके तलाशें। पीएम मोदी ने कहा कि जॉर्डन की भौगोलिक स्थिति ऐसी है, जो भारतीय कंपनियों के लिए एक मजबूत एंट्री पॉइंट बन सकती है। इससे दोनों देशों को फायदा होगा, साथ ही व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।

भूगोल है ताकत

आगे प्रधानमंत्री ने कहा कि जॉर्डन की सबसे बड़ी ताकत उसका भूगोल है, जबकि भारत के पास स्किल और बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता है। जब ये दोनों ताकतें मिलेंगी, तो साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने माना कि जॉर्डन में अभी भी बहुत संभावनाएं हैं, जिन्हें मिलकर खोला जा सकता है। खासतौर पर कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। पीएम मोदी ने कहा कि इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने से रोजगार और निवेश दोनों बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने विरासत और संस्कृति के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही।

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