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Yes Bank फॉरेक्स कार्ड डेटा लीक पर हड़कंप, CVV तक पहुंची सेंध; RBI ने मांगा पूरा हिसाब

Yes Bank
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Yes Bank : निजी क्षेत्र के Yes Bank से जुड़ा एक डेटा ब्रीच सामने आने के बाद बैंकिंग हलकों में हलचल मच गई है। मामला यस बैंक–बुकमायफॉरेक्स मल्टी-करेंसी फॉरेक्स कार्ड से जुड़ा है, जहां कई ग्राहकों के कार्ड डिटेल्स और CVV नंबर तक लीक होने की आशंका जताई गई है। इस घटना के बाद Reserve Bank of India ने बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सूत्रों के अनुसार, आरबीआई यह जानना चाहता है कि आखिर बैंकिंग सिस्टम में चूक कहां हुई और कितनी संवेदनशील जानकारी प्रभावित हुई। रिपोर्टों में बताया गया है कि 24 फरवरी को एक लैटिन अमेरिकी देश में 15 मर्चेंट्स से जुड़े संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़े गए।

Yes Bank फॉरेक्स कार्ड डेटा लीक पर हड़कंप

करीब 5,000 ग्राहकों के बीच 2.54 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन प्रोसेस हुए, जबकि लगभग 90 लाख रुपये के 688 संदिग्ध प्रयास समय रहते ब्लॉक कर दिए गए। फिलहाल, बैंक ने आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन आंतरिक जांच जारी होने की बात कही है। यस बैंक ने कहा है कि वह कार्ड नेटवर्क के साथ मिलकर चार्जबैक प्रक्रिया शुरू कर चुका है ताकि प्रभावित ग्राहकों को किसी तरह का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। वहीं, BookMyForex ने स्पष्ट किया है कि वह ग्राहकों की संवेदनशील कार्ड जानकारी अपने सर्वर पर स्टोर नहीं करता। कंपनी का दावा है कि उसके सिस्टम में किसी तरह की हैकिंग या डेटा कॉम्प्रोमाइज की पुष्टि नहीं हुई है।

आरबीआई के सख्त सवाल

रेगुलेटर ने बैंक से पूछा है कि CVV जैसे महत्वपूर्ण डेटा को किस तरीके से स्टोर और सुरक्षित रखा गया था। क्या एन्क्रिप्शन मानकों का पालन हुआ? साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल कहां कमजोर पड़े? आरबीआई ने यह भी जानना चाहा है कि संदिग्ध गतिविधियों का पता कब चला, रिपोर्टिंग की टाइमलाइन क्या रही और थर्ड-पार्टी रिस्क मैनेजमेंट कितना मजबूत था। प्रभावित ग्राहकों की सही संख्या, कार्ड ब्लॉक करने और नुकसान सीमित करने के कदमों की भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

बढ़ती डिजिटल चुनौतियां

यह घटना एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। तेजी से बढ़ते ऑनलाइन लेन-देन के दौर में डेटा सुरक्षा की जरा सी चूक लाखों ग्राहकों को जोखिम में डाल सकती है। फिलहाल, निगाहें आरबीआई की जांच और बैंक की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट होगा कि यह चूक तकनीकी थी या निगरानी में कमी का नतीजा।

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