Winter Olympics : मिलानो-कोर्टिना 2026 शीतकालीन ओलंपिक की औपचारिक शुरुआत 7 फरवरी को भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हुई, लेकिन खेलों का यह महाकुंभ पहले ही दिन विवादों में घिर गया। रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक से सजे इस समारोह ने जहां स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को आकर्षित किया, वहीं सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
उद्घाटन के कुछ ही घंटों बाद समारोह से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैलने लगीं। इन्हीं वायरल क्लिप्स ने विवाद को जन्म दिया। यूजर्स ने समारोह के अंतिम दृश्य को लेकर सवाल उठाए और आयोजकों की मंशा पर संदेह जताना शुरू कर दिया।
Winter Olympics की आलोचना
विवाद की असली वजह ओलंपिक कैल्ड्रॉन की डिजाइन को माना जा रहा है। मशहूर इटालियन स्कीयर सोफिया गोगिया ने जब ओलंपिक ज्योति प्रज्ज्वलित की, तो कुछ दर्शकों को इसकी आकृति उल्टे पेंटाग्राम जैसी दिखाई दी। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे सैटेनिज्म से जोड़ते हुए आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाए। इस पूरे मामले में अब तक अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति या आयोजन समिति की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यही चुप्पी विवाद को और हवा दे रही है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े वैश्विक मंच पर प्रतीकों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए थी।
राजनीतिक मौजूदगी
उद्घाटन समारोह में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी पत्नी उषा के साथ मौजूद थे। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिलाया। कुछ यूजर्स ने राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी के बीच उठे इस विवाद को और भी संवेदनशील करार दिया। इस बार उद्घाटन समारोह को मिलान और कोर्टिना डी’एम्पेजो में अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किया गया, जबकि मुख्य कार्यक्रम सैन सिरो स्टेडियम में हुआ। आधुनिक मंच सज्जा, लाइट शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को भव्य तो बनाया, लेकिन अंत के दृश्य ने सारी चर्चा का रुख बदल दिया।
ओलंपिक की परंपरा
शीतकालीन ओलंपिक की शुरुआत 1924 में फ्रांस के शैमॉनिक्स से हुई थी और तब से यह खेल भावना का प्रतीक रहा है। स्कीइंग, आइस हॉकी और फिगर स्केटिंग जैसे खेलों के साथ इस बार स्की माउंटेनियरिंग को भी शामिल किया गया है। हालांकि, उद्घाटन से जुड़ा यह विवाद आयोजकों के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है। फिलहाल, हालात ऐसे हैं कि खेलों की शुरुआती प्रतिस्पर्धाओं से ज्यादा चर्चा उद्घाटन समारोह की हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि आयोजक इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या यह मुद्दा खेलों की भावना पर असर डालता है या नहीं।
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