Vande Mataram:- वंदे मातरम देश का राष्ट्रीय गीत है। जिसे अब लगभग 150 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। अब ऐसे में वंदे मातरम को लेकर विवादों का घमासान छिड़ चुका है। जहां एक तरफ हिंदू वंदे मातरम के जरिए भारत माता का देवी के रूप में आवाह्न करते हैं उनका पूजन करते हैं। लेकिन वही वंदे मातरम को लेकर मुसलमानो को आपत्ति है। उनके विचार यहां इसके बिलकुल विपरीत है।
मुसलमानो को वंदे मातरम से मुख्य रूप से आपत्ति धार्मिक कारणों की वजह से है। जहां मुसलमान केवल अपने अल्लाह की इबादत करते हैं इनके इस्लाम में किसी और को पूजनीय मानना सबसे बड़ा पाप माना जाता है। अब ऐसे में इस कारण की वजह से वह वंदे मातरम का विरोध कर रहे हैं।
आखिर क्या है यह विवाद?
वंदे मातरम को लेकर यह विवाद धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय प्रतीक के बीच का जो संतुलन को लेकर है। एक तरफ जहां हिंदू इस देशभक्ति का प्रतीक मानते हैं तो वही मुसलमान इस धार्मिक मान्यताओं के विपरीत बता रहा है। जिसको लेकर विवाद छिड़ा हुआ है।
मुसलमान कर रहे “वंदे मातरम” का विरोध
मुसलमानो का मानना है कि हमसे जबरदस्ती वंदे मातरम गवाने की कोशिश ना की जाए। क्योंकि हमारे इस्लाम में केवल अल्लाह की इबादत की जाती है और इनके अलावा किसी की इबादत करना इसमें बहुत बड़ा पाप माना जाता है। जिसके चलते मुसलमानों ने अनिवार्य गायन का विरोध किया है जिसको लेकर संसद में भी बहस का घमासान छिड़ चुका है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस और भाजपा में भी इसको लेकर टकराव हो रहा है।





