Paush Amavasya 2025:- पौष अमावस्या का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है। ऐसा इसीलिए क्योंकि यह साल की सबसे आखरी अमावस्या होती है। साल की यह सबसे आखरी अमावस्या पौष महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। इस साल इस अमावस्या को 29 दिसंबर को मनाया जाएगा। यह अमावस्या हिंदू धर्म के मुताबिक बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस दिन पितरों की शांति और तर्पण के लिए पूजा पाठ की जाती है। इस दिन अगर आप विधि विधान के साथ पितरों का तर्पण करते हैं तो इससे आपको पितृदोष से मुक्ति मिलती है। आइए तर्पण कैसे किया जाता है इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
तर्पण का तरीका
पौष अमावस्या साल की सबसे आखरी अमावस्या है। इसीलिए यह बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इस दिन आपको पितरों के तर्पण के लिए सबसे पहले सुबह उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान कर लेना है या फिर घर में गंगाजल मौजूद है तो उसे आप पानी में मिलाकर नहा सकते हैं। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें इन इन वस्त्रों का कलर या तो सफेद या फिर पीला होना चाहिए।
इसके बाद तर्पण के लिए दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके बैठ जाए क्योंकि यह दिशा यह और पितरों की दिशा होती है। अब तांबे के लोटे में जल ले और काला तिल इसके साथ थोड़ा सा कच्चा दूध और जौं मिला ले। अब इसके बाद दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली और अंगूठे के बीच से जल को नीचे की तरफ धीरे-धीरे जमीन पर छोड़ना है ऐसा करते समय आपको गोत्र का नाम लेते हुए अपने पितरों का भी नाम लेना है।
इसके साथ ही तर्पण के दौरान आपको मंत्रों का जाप करना है। आप ‘ॐ पितृगणाय विद्महे जगत् धारिण्ये धीमहि तन्नो पितृः प्रचोदयात्’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इन मित्रों का जाप कर सकते हैं। इस प्रकार आप विधि विधान के साथ पितरों के तर्पण की पूजा कर सकते हैं।
तर्पण के दिन करें या शुभ कार्य
पितरों का तर्पण करने के बाद में आपको कुछ शुभ कार्य करने होते हैं, जैसे आप किसी गरीब या जरूरतमंद ब्राह्मण को भोजन कर सकते हैं और वस्त्र या दक्षिण का भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही आप एक रोटी पर घी लगा करके गुड़ रखकर गाय को भी खिला सकते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि गाय में सभी देवताओं का वास होता है। गाय को घी और गुड़ की रोटी खिलाना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आपके पितरों की कृपा आप पर बनी रहेगी।
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