कोरोना से ठीक हुआ तो चली गई आवाज, वह सुधरी तो कफ के साथ आने लगा खून, अब फेफड़े में ब्लैक फंगस का अटैक

कोरोना के साइड इफेक्ट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 50 साल का एक मरीज पटना मेडिकल कॉलेज के ब्लैक फंगस वार्ड में भर्ती हुआ है, जिस पर कोरोना से कई तरह का असर हुआ है। मई में कोरोना हुआ और जून में आवाज चली गई। इलाज चल ही रहा था कि सितंबर में पहले कफ के साथ खून आना शुरू हुआ और अब 7 सितंबर को फेफड़े में ब्लैक फंगस हो गया है। दरभंगा के कुशेश्वर स्थान के रहने वाले मरीज त्रिवेणी साह पर कोरोना के तरह-तरह के असर से परिवार परेशान है।

त्रिवेणी साह के बेटे नागेंद्र ने बताया- ‘कोरोना की कभी जांच नहीं कराई गई, लेकिन डॉक्टरों ने कुछ रिपोर्ट देखकर पूर्व में कोरोना होने की बात कही थी। उनका कहना है कि 18 मई 2021 को खांसी के साथ अन्य परेशानी के कारण अस्पताल ले जाया गया था। इस दौरान डॉक्टरों ने भर्ती किया और लगभग 10 घंटे ऑक्सीजन पर रखा था। HRCT की रिपोर्ट पर डॉक्टरों ने बताया था कि पूर्व में कोरोना हुआ होगा। बाद में जांच कराई गई तो कोरोना का संक्रमण ठीक हो गया था।’

उन्होंने बताया- ‘इस बीच 9 जून को अचानक से आवाज ही चली गई। दरभंगा मेडिकल कॉलेज से लेकर कई अस्पतालों में इलाज कराया गया, लेकिन आवाज पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाई। आवाज में थोड़ा सुधार हुआ तो कफ से खून भी आने लगा। कफ से खून आने के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना आए। IGIMS में जांच-पड़ताल हुई, जिसमें बताया गया फेफड़े में ब्लैक फंगस है।’

अब तक ब्लैक फंगस का मामला आंख, नाक और ब्रेन में देखा गया है, लेकिन त्रिवेणी साह के फेफड़े में ब्लैक फंगस पाया गया है। नागेंद्र ने बताया- ‘IGIMS में कई दिनों तक जांच में यह पता चला है कि फेफड़े में ब्लैक फंगस हो गया है। इस रिपोर्ट से पूरा परिवार डरा हुआ है।’ मरीज त्रिवेणी के बेटे का कहना है- ‘बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी। डॉक्टरों को लगा था कि टीबी है और इसकी दवाएं भी चली, लेकिन आराम नहीं हुआ। IGIMS में 3 तरह की जांच में पता चला फेफड़े में ब्लैक फंगस है। अब PMCH में ब्लैक फंगस की दवा एम्फोटेरेसिन बी ही नहीं है। इस कारण से इलाज नहीं हो रहा है। आरोप है कि डॉक्टर भी देखने नहीं आ रहे हैं।’

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