Wedding Card : किसी शादी का न्योता मिलते ही सबसे पहले दिमाग में एक ही सवाल घूमता है कि आखिर पहनें क्या? खासकर महिलाओं के लिए यह फैसला और भी उलझन भरा हो जाता है, क्योंकि कपड़ों के साथ जूलरी, फुटवियर और मेकअप तक सब कुछ मैच करना होता है। पहले यह परेशानी सीमित थी, लेकिन अब शादी के कार्ड ने इसे कई गुना बढ़ा दिया है। आजकल वेडिंग इनविटेशन सिर्फ शादी की जानकारी तक सीमित नहीं रहे। कार्ड खोलते ही रंगों, थीम और स्टाइल से जुड़े निर्देश सामने आ जाते हैं। कहीं ‘पेस्टल एलिगेंस’ लिखा होता है तो कहीं ‘बोहेमियन नाइट’। मेहमान समझ ही नहीं पाते कि यह शादी का न्योता है या किसी फैशन शो का प्रवेश पत्र।
नए दौर के कपल्स चाहते हैं कि उनकी शादी की हर तस्वीर सोशल मीडिया पर परफेक्ट दिखे। इसी चाह में वे पूरी शादी को एक खास थीम में ढाल देते हैं और उम्मीद करते हैं कि मेहमान भी उसी रंग और स्टाइल में नजर आएं। कई बार तो कार्ड के साथ डिजिटल मूड बोर्ड भेजे जाते हैं, ताकि कोई भ्रम न रहे। मगर यही कोशिश कई लोगों के लिए नई उलझन बन जाती है।
Wedding Card आया या फैशन एग्जाम?
पहले ‘फॉर्मल’ और ‘कैजुअल’ जैसे आसान शब्द काफी थे, लेकिन अब उनकी जगह ‘फार्महाउस फॉर्मल’, ‘वेस्टर्न शीक’ या ‘एलिवेटेड ट्रेडिशनल’ जैसे जटिल टर्म्स ने ले ली है। एटिकेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब ड्रेस कोड के साथ ‘ऑप्शनल’ जोड़ दिया जाता है, तो मेहमान और ज्यादा असमंजस में पड़ जाते हैं कि ज्यादा सजें या साधारण रहें? कई शादियों में तो ड्रेस कोड इतना अटपटा होता है कि लोग मजाक में भी लेने लगते हैं। ‘ऑटमन फॉर्मल (सर्कस अटायर एनकरेज्ड)’ जैसे शब्द पढ़कर मेहमान सोच में पड़ जाते हैं कि वे किसी शादी में जा रहे हैं या किसी थीम पार्टी में। ऐसे निर्देश पहनावे को मजेदार बनाने के बजाय तनाव बढ़ा देते हैं।
ड्रेस कोड न माना तो शिकायत!
इस ट्रेंड का सबसे नकारात्मक पहलू तब सामने आता है, जब कोई मेहमान थीम के मुताबिक कपड़े नहीं पहन पाता। खासकर वे लोग जो ‘प्लस वन’ के तौर पर आते हैं, उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में उनकी आलोचना होना या ताने सुनना शादी के माहौल को बिगाड़ देता है। अगर कोई ड्रेस कोड फॉलो न कर पाए, तो एक अच्छे मेजबान को उसे अपनापन और सम्मान देना चाहिए।
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