महिलाओं को टिकट दिलवाने की पैरवी के लिए वाटर ने की “अब है मेरी बारी” अभियान की शुरुआत

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पटना, 18 सितम्बर: महिलाओं को टिकट दिलवाने की पैरवी दिलाने के लिए शिल्पी अरोड़ा ने की बिहार में “अब है मेरी बारी” कैंपेन की शुरुआत की. इसकी जानकारी वाटर की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शिल्पी अरोड़ा ने शुक्रवार को ज़ूम पर आयोजित ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दी।

शिल्पी अरोड़ा ने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने और चुनाव में उन्हें पचास फीसद टिकट दिलाने की पैरवी के लिए हमने यह कार्यक्रम ‘अब है मेरी बारी’ की शुरुआत की है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले दिल्ली में इस तरह का कार्यक्रम कर चुकी हैं। अभी बिहार में चुनाव है तो हम विभिन्न राजनीतिक दलों में निर्णय लेने नेताओं से मिल रहे हैं और पदाधिकारियों से इस बात की पैरवी कर रहे हैं कि वे महिलाओं को अधिक से अधिक टिकट दें। आगे उन्होंने कहा कि हम आम लोगों को जागरूक भी करेंगे कि वे अधिक से अधिक महिलाओं को जीत दिलाएं। इसके लिए हम सड़कों पर उतरेंगे और रैली करेंगे। हमारे पास देश भर में 50 हज़ार वालंटियर्स है जिनकी मदद से हम लोगों के बीच पहुंचेंगे।

श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि अभी 10% से भी कम महिलाओं को टिकट मिलते हैं। महिलाओं को 33% टिकट देने का आरक्षण सांसद में पिछले एक दशक से लंबित है। ऐसी परिस्थिति में क़ानून बनने का इंतज़ार करने के बजाय जन जागरण से महिलाओं की चुनावी भागीदारी बढ़ाई जाने की ज़रूरत है। बिहार में एक भी महिला मंत्री नहीं हैं। यही काम करने का बीड़ा ‘वाटर’ ने उठाया है और इसी के लिए हमने यह अभियान शुरू किया है ‘अब है मेरी बारी’।

उन्होंने स्वर्गीय राजीव गांधी को याद करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया कि पंचायती चुनाव में महिलाओं की भागीदारी 50% तक हुई। इसी तरह टीएमसी और बीजेडी की वजह से संसद में महिलाओं की भागीदारी 14% तक हुई जो पहले बमुश्किल 11% होती थी।

महिला सुरक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संसद और विधान सभा में महिलाएं पहुंचेंगी तो महिलाओं के खिलाफ अपराध कम करने में भी मदद मिलेगी। महिलाओं को राजनीति में लैंगिक समानता इसीलिए जरूरी है। महिलाएं अगर टिकट देने के निर्णय में शामिल होंगी तभी उनकी भागीदारी बढ़ेगी। महिलाओं को जब ज़िम्मेदारी दी जाएगी तो वे भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी। महिलाएं अगर घर का बजट बेहतर तरीके से चलाती है तो वे देश का बजट भी बेहतर तरीके से चला सकती हैं। ज़रूरत है मौक़ा देने की है।

चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारा संगठन चुनाव नहीं लड़ेगा बल्कि महिलाओं की उम्मीदवारी बढ़ाने और उनकी जीत में मदद करेंगे। हम किसी एक महिला की पैरवी नहीं करते बल्कि हर महिला की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं। हम सभी महिला उम्मीदवार की मदद करेंगे, चाहे वे किसी भी पार्टी से हो। यदि एक ही जगह दो महिलाएं उम्मीदवार होंगी तो हम दोनों को समान रूप से मदद करेंगे, बाक़ी उनकी अपनी मेहनत और विचारधारा है जो फैसला करेंगी।

इस मौके पर डॉ शुभा राजन, डॉ बिन्द्या बंसल, आरोहन संस्था से  रानी पटेल और सविता साध मौजूद थी.

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