Vastu Tips : भारतीय घरों में कबूतर का दिखना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जैसे ही ये पक्षी बालकनी, छज्जे या छत पर बार-बार आने लगते हैं, सवाल उठने लगते हैं। कोई इसे शुभ मानता है तो कोई इसे भविष्य की परेशानी से जोड़ देता है। ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र में कबूतर को लेकर अलग-अलग संकेत बताए गए हैं, जिनका अर्थ स्थिति पर निर्भर करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कबूतर को शांति, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। अगर कोई कबूतर आपके घर आता है, थोड़ी देर ठहरता है और फिर उड़ जाता है, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और परिवार में मानसिक शांति बनी रहती है। कई मान्यताओं में कबूतर को लक्ष्मी से भी जोड़ा गया है, जो सुख-समृद्धि का संकेत देता है।
Vastu Tips: घर में कबूतर का बसेरा
वास्तु शास्त्र में कबूतर का लंबे समय तक घर में रहना या घोंसला बनाना अच्छा नहीं माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में अस्थिरता आती है और कामकाज में रुकावटें बढ़ सकती हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे आर्थिक दबाव, निर्णयों में भ्रम और पारिवारिक तनाव से जोड़कर देखते हैं। खासतौर पर बालकनी या खिड़की में बना घोंसला वास्तु दोष का कारण माना जाता है। शकुन शास्त्र के अनुसार, अगर कबूतर आपके घर में अंडे दे देता है, तो यह आने वाली चुनौतियों का संकेत हो सकता है। इसे सावधानी का इशारा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति को पैसों, सेहत और पारिवारिक रिश्तों को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
स्वास्थ्य और सफाई का व्यावहारिक पहलू
मान्यताओं से अलग अगर व्यावहारिक नजरिए से देखें तो कबूतरों की गंदगी से बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उनकी बीट से एलर्जी, सांस की समस्या और संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। वास्तु के अनुसार, भी गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे घर का माहौल प्रभावित होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से कबूतरों को दाना डालना पुण्य का काम माना गया है, लेकिन बेहतर है कि यह कार्य घर से दूर खुले स्थान पर किया जाए। घर में जहां कबूतर आते हों, वहां नियमित सफाई जरूरी है। अगर वे घोंसला बनाने लगें, तो उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना धीरे-धीरे किसी सुरक्षित जगह की ओर मोड़ देना ही सही उपाय माना जाता है।
घर में कबूतर का आना न पूरी तरह शुभ है और न ही पूरी तरह अशुभ। असली मायने इस बात के हैं कि आप स्थिति को कैसे संभालते हैं। मान्यताओं के साथ-साथ साफ-सफाई, संतुलन और करुणा अपनाई जाए, तो किसी भी तरह की नकारात्मकता से बचा जा सकता है।
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