Uttarakhand : केंद्रीय बजट को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा कि यह बजट उत्तराखंड के लिए केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकास की ठोस रूपरेखा है। सोमवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में सीएम ने कहा कि बजट के बाद राज्य में करीब 40 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू होने जा रहे हैं, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में विकास पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर नहीं, बल्कि उसके संरक्षण के साथ किया जाएगा। पहाड़ी राज्य की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि प्रकृति और प्रगति दोनों साथ चलें।
Uttarakhand को केंद्रीय बजट से मिली रफ्तार
उन्होंने इसे “संतुलित विकास मॉडल” करार दिया। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का देवभूमि उत्तराखंड से विशेष भावनात्मक जुड़ाव है। इसी कारण केंद्रीय बजट में राज्य की जरूरतों और संभावनाओं को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह बजट पहाड़ी और सीमांत राज्यों के लिए अवसरों का नया द्वार खोलता है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 16वें वित्त आयोग के माध्यम से उत्तराखंड को करीब 1800 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने की संभावना है। यह राशि बुनियादी ढांचे, सड़कों, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में खर्च की जाएगी, जिससे आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
पर्यटन और ट्रैकिंग से रोजगार विस्तार
सीएम धामी ने कहा कि पर्वतीय ट्रैकिंग ट्रेल्स के विकास से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ट्रैकिंग गाइड्स के कौशल विकास पर भी फोकस किया जाएगा, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों की जरूरतों को पूरा कर सकें। उन्होंने बताया कि बादाम और अखरोट जैसे पहाड़ी उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय उद्योगों के पुनर्जीवन पर काम होगा, जिससे पलायन रोकने में मदद मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
LIVE: केंद्रीय बजट 2026 – 27 के संबंध में प्रदेश भाजपा कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस
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आयुष एम्स का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में आयुष एम्स की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से औपचारिक निवेदन किया जाएगा। इससे राज्य को आयुष और वैकल्पिक चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। बजट में दिख रही प्राथमिकताएं बताती हैं कि आने वाले वर्षों में पहाड़ी कृषि, स्वास्थ्य, आयुष और हरित पर्यटन राज्य की पहचान बन सकते हैं। अगर योजनाएं ज़मीनी स्तर पर समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो उत्तराखंड न सिर्फ निवेश के लिए आकर्षक बनेगा, बल्कि युवाओं को अपने ही प्रदेश में भविष्य तलाशने का भरोसा भी देगा।
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