Uttarakhand : हिमालय की ऊंची चोटियों पर हालिया बर्फबारी ने ऐसा नजारा रचा है, जिसने प्रकृति प्रेमियों से लेकर श्रद्धालुओं तक को ठिठक कर देखने पर मजबूर कर दिया है। धारचूला और मुनस्यारी के बीच एक पर्वत शिखर पर बर्फ की सफेद चादर में ‘ॐ’ की साफ-सुथरी आकृति उभर आई है। दूर से देखने पर यह आकृति इतनी स्पष्ट नजर आती है कि मानो किसी कलाकार ने ब्रश से उसे उकेर दिया हो। स्थानीय लोग इसे हिमालय का दूसरा ओम पर्वत कहकर पुकारने लगे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह आकृति पहले भी दिखाई देती थी, लेकिन बर्फ कम होने के कारण इसकी रेखाएं धुंधली रहती थीं। हाल की भारी बर्फबारी के बाद जब पर्वत पूरी तरह सफेद हुआ, तब ओंकार का स्वरूप साफ होकर सामने आ गया।
Uttarakhand: बर्फबारी के बाद अद्भुत नजारा
अब यह आकृति इतनी स्पष्ट है कि सुबह और शाम की धूप में अलग-अलग रंगों में चमकती दिखाई देती है। यही वजह है कि दूर-दराज के गांवों से लोग केवल इसके दर्शन के लिए नजरें टिकाए बैठे हैं। धार्मिक मान्यताओं में हिमालय क्षेत्र का विशेष महत्व रहा है। पुराणों में आठ ओम पर्वतों का उल्लेख मिलता है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे अलग-अलग कालखंडों में प्रकट होंगे। क्षेत्र के कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि धारचूला-मुनस्यारी के बीच दिखाई दे रहा यह पर्वत उन्हीं आठ में से एक हो सकता है। शिव की भूमि माने जाने वाले हिमालय में ओम की आकृति दिखना लोगों की आस्था को और गहरा कर रहा है।
दर्शन, पूजा और उत्साह का माहौल
ओम की आकृति सामने आने के बाद इलाके में अलग ही माहौल बन गया है। लोग दूर से ही पर्वत की ओर नमन कर रहे हैं, कुछ स्थानों पर सामूहिक पूजा-अर्चना भी शुरू हो गई है। बुजुर्ग इसे शुभ संकेत मान रहे हैं, जबकि युवा इसे प्रकृति का चमत्कार कहकर तस्वीरों में कैद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेजी से फैल रही है। इस विषय पर मत अलग-अलग हैं। शिक्षाविद डीएस पांगती का कहना है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें बर्फ जमने और पिघलने के तरीके ने यह आकृति बनाई है। वहीं, विद्वान पंडित भाष्कर चंद्र जोशी मानते हैं कि पुराणों में जिन ओम पर्वतों का उल्लेख है, यह उसी परंपरा की अगली कड़ी हो सकती है, जो कलियुग में धीरे-धीरे प्रकट हो रही है।
पहले देखी गई आकृति से भी विशाल
डीडीहाट क्षेत्र में बीते मार्च माह में भी ओम जैसी आकृति नजर आई थी, लेकिन तब बर्फ कम होने के कारण उसका स्वरूप पूरी तरह स्पष्ट नहीं था। जानकारों के अनुसार, धारचूला-मुनस्यारी के बीच उभरी नई आकृति आकार में मूल ओम पर्वत से भी बड़ी प्रतीत हो रही है। फिलहाल, यह ओंकार हिमालय में प्रकृति और अध्यात्म के अनोखे संगम का प्रतीक बन गया है।
Read More : Uttarakhand में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, बर्फबारी के आसार





