UP News : नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और एक ग्राहक के बीच दुर्घटना बीमा भुगतान को लेकर विवाद आखिरकार उपभोक्ता फोरम तक पहुंच गया। कंपनी ने जहां पूरे क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया। वहीं, ग्राहक ने इसे सेवा में कमी बताते हुए कानूनी रास्ता अपनाया। मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को ग्राहक के पक्ष में भुगतान करने का आदेश सुनाया।
विकासनगर निवासी अभिषेक शुक्ला ने उपभोक्ता फोरम में दायर वाद में बताया कि उन्होंने निजी उपयोग के लिए एक कार खरीदी थी, जिसका एक वर्ष का बीमा कराया गया था। बीमा प्रीमियम की पूरी राशि समय पर जमा की गई थी। बीमा अवधि के दौरान उनकी गाड़ी एक सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना की सूचना तत्काल बीमा कंपनी को दी गई और नियमानुसार क्लेम की प्रक्रिया शुरू की गई।
UP News: बीमा कंपनी ने दुर्घटना क्लेम देने से किया इनकार
बीमा कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेयर ने गाड़ी की जांच की और मरम्मत कराकर बिल जमा करने को कहा। इसके बाद वादी ने गाड़ी की मरम्मत कराई और लगभग एक लाख 45 हजार रुपये का बिल बीमा कंपनी को सौंपा। लेकिन कंपनी ने पूरे बिल को मानने से इनकार कर दिया और केवल 80 हजार रुपये देने की बात कही। ग्राहक ने सभी जरूरी दस्तावेज और बिल प्रस्तुत किए, इसके बावजूद अतिरिक्त राशि देने से कंपनी ने साफ मना कर दिया।
बीमा कंपनी ने दी सफाई
फोरम में बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि दुर्घटना की जगह को लेकर वादी के बयान में विरोधाभास है। उन्होंने यह भी कहा कि गाड़ी की मरम्मत कंपनी के अनुसार पंजीकृत सर्विस सेंटर पर नहीं कराई गई। अधिवक्ता ने दावा किया कि अन्य सर्विस सेंटर से कराई गई जांच में भी मरम्मत खर्च 80 हजार रुपये ही आंका गया था और इस संबंध में ग्राहक को पत्र भेजा गया, जिसका कोई जवाब नहीं मिला।
सर्वेयर की रिपोर्ट बनी अहम आधार
वहीं, वादी के अधिवक्ता ने दलील दी कि बीमा कंपनी के सर्वेयर ने जांच के बाद यह स्पष्ट किया था कि मरम्मत का पूरा भुगतान किया जाएगा। सर्वेयर ने किसी विशेष सर्विस सेंटर से मरम्मत कराने की कोई शर्त नहीं रखी थी। ऐसे में बाद में भुगतान में कटौती करना नियमों के खिलाफ है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मदन लाल निगम और सदस्य सुनीता मिश्र व प्रतिमा सिंह ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। फोरम ने बीमा कंपनी को एक लाख 42 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। इसके साथ ही एक हजार रुपये क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश भी दिए गए। यह फैसला बीमा दावों में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
Read More : BCCL की दमदार एंट्री, लिस्टिंग के साथ ही निवेशकों का पैसा लगभग दोगुना!




