UP News : संयुक्त अस्पताल परिसर में संचालित वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) अब जिले की महिलाओं और बालिकाओं के लिए राहत और भरोसे का केंद्र बनता जा रहा है। हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिलाएं यहां बिना झिझक पहुंच रही हैं और उन्हें त्वरित सहायता मिल रही है। केंद्र का उद्देश्य साफ है कि पीड़िता को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और हर जरूरी मदद एक ही जगह उपलब्ध हो।
अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच ओएससी ने 899 मामलों में सहायता प्रदान की। ये आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब अपनी आवाज उठाने लगी हैं। घरेलू हिंसा से लेकर मानसिक प्रताड़ना, यौन अपराध और साइबर अपराध तक हर तरह के संवेदनशील मामलों को गोपनीयता के साथ संभाला गया।
UP News: 899 पीड़िताओं को मिला सहारा
केंद्र की टीम ने पीड़िताओं की पहचान सुरक्षित रखते हुए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई। केंद्र में आने वाले मामलों में घरेलू हिंसा शीर्ष पर रही। इसके अलावा दहेज उत्पीड़न, कार्यस्थल पर यौन शोषण, मानसिक और शारीरिक हिंसा तथा सामाजिक विवादों के मामले भी बड़ी संख्या में दर्ज हुए। खास बात यह रही कि नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसे अधिकारी इस रूप में देख रहे हैं कि अब महिलाएं चुप रहने के बजाय मदद मांगने के लिए आगे आ रही हैं।
पूरी व्यवस्था
वन स्टॉप सेंटर की सबसे बड़ी ताकत इसकी समग्र व्यवस्था है। यहां पीड़ित महिला को मनोसामाजिक काउंसलिंग, चिकित्सीय सहायता, कानूनी परामर्श और पुलिस सहयोग एक साथ मिलता है। जरूरत पड़ने पर अस्थायी आश्रय की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इससे पीड़िताओं को अलग-अलग कार्यालयों में भटकना नहीं पड़ता और उनकी गोपनीयता भी बनी रहती है।
मदद के लिए आएं आगे
सखी वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी प्रीति चौधरी ने बताया कि केंद्र में हर पीड़िता को संवेदनशीलता के साथ सुना और समझा जाता है। वहीं जिला प्रोबेशन अधिकारी मनोज पुष्कर ने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा का शिकार महिला या बालिका हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती है। पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाती है। ओएससी अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच बनकर सामने आ रहा है।
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