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UP में महापौर ने एसडीएम सदर के विरुद्ध खोला माेर्चा; कमिश्नर, डीएम से शिकायत

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UP News : धीमरी गांव में सरकारी जमीन की पैमाइश के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब तहसील प्रशासन की टीम ने एक बाउंड्रीवाल को जेसीबी से गिरा दिया। यह बाउंड्रीवाल शहर के महापौर विनोद अग्रवाल की बताई जा रही है। जैसे ही इस कार्रवाई की जानकारी महापौर तक पहुंची, इलाके में हलचल मच गई। महापौर ने आरोप लगाया कि टीम ने बिना पूरी जानकारी के उनकी जमीन की बाउंड्रीवाल गिरा दी और विरोध की खबर मिलते ही अधिकारी मौके से चले गए।

महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि तहसील प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई की थी। उनके मुताबिक, टीम जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंची और बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया।

UP में महापौर ने खोला माेर्चा

उन्होंने कहा कि जमीन उनकी निजी संपत्ति है और वहां पिछले कई वर्षों से खेती की जा रही है। महापौर का आरोप है कि इस कार्रवाई से उनकी गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन और मंडल स्तर के अधिकारियों से की है। महापौर के अनुसार, उन्होंने करीब दस साल पहले धीमरी गांव में करीब नौ बीघा जमीन खरीदी थी। तब से लेकर अब तक उसी जमीन पर खेती होती रही है और उसके चारों ओर बाउंड्रीवाल भी बनी हुई है। उनका कहना है कि जमीन की स्थिति पिछले दस वर्षों से जस की तस है और उसमें किसी सरकारी भूमि का अतिक्रमण नहीं है। ऐसे में बिना किसी पूर्व सूचना के बाउंड्रीवाल गिराना पूरी तरह गलत कार्रवाई है।

प्रशासन का तर्क

दूसरी ओर तहसील प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी भूमि की पैमाइश के दौरान की गई। अधिकारियों के मुताबिक, जिस जगह बाउंड्रीवाल बनी थी उसका कुछ हिस्सा सरकारी गाटा में आ रहा था। इसी वजह से उसे हटाया गया। दरअसल उस इलाके में कक्षा एक से बारहवीं तक के लिए एक कंपोजिट विद्यालय बनाए जाने की योजना है, जिसके लिए सरकारी जमीन का सीमांकन किया जा रहा था।

दोबारा पैमाइश कराने की तैयारी

मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए दोबारा पैमाइश कराने की बात कही है। जिलाधिकारी अनुज सिंह ने कहा कि महापौर की शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच की जाएगी। उनके मुताबिक, अधिकारियों की मौजूदगी में दोबारा जमीन की माप कराई जाएगी और अगर किसी स्तर पर गलती सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। फिलहाल इस विवाद ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा जरूर बढ़ा दी है।

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