Trump Tariff : देश में मखाना उत्पादन की रीढ़ माने जाने वाले सीमांचल और मिथिलांचल के व्यापारियों के लिए अमेरिका से आ रही खबरें राहत देने वाली नहीं हैं। अमेरिकी सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने की तैयारी ने मखाना कारोबार की नींव हिला दी है। आने वाले महीनों में इसका सीधा असर कीमत, मांग और निर्यात पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब तक अमेरिका में मखाने पर करीब 3.5 प्रतिशत टैरिफ लगता था, लेकिन बदले हालात में इसे लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी बताई जा रही है।
इतना बड़ा उछाल होने पर अमेरिकी बाजार में मखाना आम उपभोक्ता की पहुंच से बाहर हो सकता है। नतीजतन वहां इसकी बिक्री में 40 से 60 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।
Trump Tariff: मखाना की कीमत में भारी वृद्धि
अमेरिका में मांग घटने का सीधा असर बिहार के स्थानीय बाजारों पर दिखेगा। निर्यात कम होने से मंडियों में मखाने की आवक बढ़ेगी, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। व्यापारियों का मानना है कि अगर अमेरिकी बाजार कमजोर पड़ा तो उन्हें नए देशों में खरीदार तलाशने पड़ेंगे। यह संकट केवल मखाने तक सीमित नहीं है। बिहार से अमेरिका को निर्यात होने वाले जर्दालु और मालदा आम, लीची, हल्दी, मधुबनी पेंटिंग, भागलपुरी सिल्क और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद भी टैरिफ की चपेट में आ सकते हैं। शुल्क बढ़ने से इन सभी वस्तुओं की कीमत अमेरिका में बढ़ेगी और मांग घटेगी।
इतना होता है उत्पादन
पूर्णिया, सीमांचल और मिथिलांचल देश के करीब 90 प्रतिशत मखाने का उत्पादन करते हैं। खासकर पूर्णिया मखाना उत्पादन और व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। सबौर मखाना-वन बीज के आने के बाद यहां उत्पादन क्षेत्र तेजी से बढ़ा है और आज सिर्फ पूर्णिया में करीब 10 हजार हेक्टेयर में मखाना की खेती हो रही है। पूर्णिया का हरदा बाजार राज्य की सबसे बड़ी मखाना मंडी है। यहां 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां सक्रिय हैं और पूरे देश में मखाने का भाव यहीं से तय होता है। अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों को यहीं से मखाना भेजा जाता है, लेकिन टैरिफ बढ़ने से यह निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
सरकार से उम्मीद
मखाना उद्यमियों का कहना है कि निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका पर निर्भर है। टैरिफ बढ़ने से वहां कीमतें बढ़ेंगी और मांग गिरेगी। कारोबारियों का मानना है कि अब यूरोप, मध्य पूर्व और एशियाई देशों में नए बाजार खोजने होंगे। इसके लिए सरकार से सहयोग और ठोस नीति की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिकी टैरिफ ने यह साफ कर दिया है कि किसी एक बाजार पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। बिहार का मखाना वैश्विक पहचान बना चुका है, लेकिन अब उसे बचाए रखने के लिए नए रास्ते और नए बाजार तलाशना वक्त की जरूरत बन गया है।
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