UP Monsoon 2026 : उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून को लेकर राहत भरी खबर नहीं है। मौसम विशेषज्ञों के ताजा आकलन के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम के इस बदले मिजाज का असर खेती, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे सकता है।
मौसम विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 10 जिलों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जा सकती है। वहीं राज्य के लगभग 60 जिलों में सामान्य औसत से कम वर्षा होने का अनुमान है। ऐसे में किसानों के साथ-साथ प्रशासन भी आगामी महीनों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
UP Monsoon 2026
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण जून के शुरुआती दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। इससे कुछ समय के लिए गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी और इसके बाद तापमान में दोबारा तेजी से बढ़ोतरी होगी। आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के मध्य तक उत्तर प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि मानसून सामान्य समय से पहले सक्रिय होगा, मगर वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसके आगमन में देरी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की वास्तविक स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।
सामान्य से कम बारिश का अनुमान
राज्य में मानसून सीजन के दौरान सामान्य तौर पर 820 से 840 मिलीमीटर के बीच वर्षा दर्ज की जाती है। लेकिन इस वर्ष बारिश का आंकड़ा इससे नीचे रहने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार प्रदेश में औसत वर्षा करीब 8 प्रतिशत तक कम रह सकती है। यदि ऐसा होता है तो जलाशयों, भूजल स्तर और कृषि गतिविधियों पर इसका असर दिखाई देगा।
लू का भी बढ़ेगा खतरा
कम बारिश का असर सीधे तापमान पर भी पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून के दौरान दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। कई क्षेत्रों में पारा सामान्य स्तर से 1.5 से 3 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है। इसके चलते हीटवेव यानी लू के दिन भी बढ़ने की संभावना है। सामान्य वर्षों में जून महीने के दौरान कुछ दिनों के लिए ही लू चलती है, लेकिन इस बार इसकी अवधि बढ़ सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक कम बारिश और अधिक तापमान के कारण लोगों को लंबे समय तक गर्म हवाओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है।
धान की खेती पर मंडरा रहा खतरा
उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान है, जिसकी खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यदि जुलाई और अगस्त में अपेक्षित वर्षा नहीं हुई तो धान की रोपाई और फसल विकास प्रभावित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं।
कमजोर मानसून के पीछे दो बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून की कमजोरी के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का तेजी से सक्रिय होना, जो भारतीय मानसून को प्रभावित करता है। दूसरा, पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में विकसित शक्तिशाली चक्रवाती गतिविधियां, जो मानसूनी नमी को अपनी ओर खींच रही हैं। इन दोनों कारणों से मानसूनी हवाओं की ताकत कम हुई है और बारिश प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
आने वाले सप्ताह होंगे अहम
मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ सप्ताह मानसून की दिशा और प्रभाव को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की कमी, बढ़ती गर्मी और कृषि चुनौतियां एक साथ देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में किसान, प्रशासन और आम लोगों को मौसम के बदलते संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।
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