चिराग का छलका दर्द, बोले-जब अपनों ने ही छला, तो दूसरों से क्या गिला?

कहते हैं कि जब अपने से लड़ना हों तो किसी का भी हौसला टूट सकता है. इसके उदाहरण हमने महाभारत युद्ध में कौरवों और पांडवों के बीच संघर्ष के दौरान के उद्धरणों में सुना है. यहीं भगवान श्री कृष्ण पार्थ अर्जुन को कहते हैं कि धर्म युद्ध में अपने-पराये का भेद नहीं किया जाता है, अधर्म के नाश के लिए युद्ध किया जाता है. बिहार की सियासत में भी चिराग पासवान अपनी लड़ाई को धर्म-अधर्म से जोड़कर देख रहे हैं. दरअसल, एलजेपी में अपनों के बीच सियासी जंग छिड़ी हुई है और टूट हो गई है. एक गुट के  पशुपति कुमार पारस हैं तो एक के चिराग पासवान. चिराग इसे धर्म और अधर्म के बीच सियासी युद्ध घोषित कर चुके हैं और अपनी लड़ाई आगामी 5 जुलाई से पूरे बिहार में संघर्ष यात्रा शुरू कर आगे बढ़ाने जा रहे हैं. हालांकि वे अपनों द्वारा छले जाने से बेहद आहत हैं, भावुक हैं, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी पर उनका भरोसा अब भी कायम है.

एक मीडिया हाउस से बात करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि जिनकी गोद (चाचा पशुपति कुमार पारस) में मैं खेला उन्होंने अपने हाथ खींच लिए. अब बात करने तक को तैयार नहीं.  पहले मैं बीमारी से लड़ा, फिर परिवार से लड़ना पड़ा. मैं दुखी इसलिए हूं क्योंकि जब अपने ही मेरे साथ नहीं हैं तो फिर दूसरों (जेडीयू) से क्या ही सिकवा करूं.

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