खुल गई ‘टीका एक्सप्रेस’ की पोल, ढोये जा रहे हैं सवारी, 17 दिन में लगे 3,198 टीके, लक्ष्य था 1.36 लाख

इस समय स्वास्थ्य गलियारे से चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सरकार की कोरोना टीका एक्सप्रेस ऐसी तस्वीरें वायरल हो रही हैं कि उनके क्रियाकलाप पर बड़े सवाल उठने लगे हैं। कोरोना टीका एक्सप्रेस में वैक्सीन की जगह पैसेंजर्स ढोये जा रहे हैं। इन तस्वीरों को देखकर यह सहज ही कहा जा सकता है कि सरकार की मंशा लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने की नहीं है, जबकि उन वाहनों से पैसेंजर्स को ढोकर रुपए कमाने की रह गई है। राज्य में ऐसी तस्वीर वायरल हो रही है कि जिसमें टीका लगाने वाली गाड़ी से परिवार को ढोया जा रहा है। बिहार के कई जिलों से ऐसी गाड़ियों की तस्वीर वायरल हुई हैं।

बता दें कि, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने प्रदेश में 121 वाहनों को विशेष टीकाकरण अभियान के लिए रवाना किया था। यूनिसेफ ने 40 और केयर इंडिया ने 81 गाड़ियां इस मुहिम में लगाई हैं। हर गाड़ी पर दो-दो कर्मियों की तैनाती की गई। पटना में इस बड़े मिशन के बाद भी वैक्सीनेशन की रफ्तार सुस्त पड़ी हुई है। पटना में लगे 40 वाहनों को एक दिन में 8000 लोगों को वैक्सीन देना था और 17 दिनों में यह लक्ष्य 1.36 लाख निर्धारित हुआ, लेकिन अब तक मात्र 3198 टीकाकरण ही हो पाया है।

जानकारी के अनुसार, 17 दिन में रिजल्ट इस प्रकार है। अजीमाबाद अंचल में 6 गाड़ी से 590 वैक्सीनेशन, बांकीपुर अंचल में 6 गाड़ी से मात्र 930 वैक्सीनेशन, कंकड़बाग अंचल में 6 गाड़ी से मात्र 389 वैक्सीनेशन, नगर परिषद दानापुर में 2 गाड़ी से 230 वैक्सीनेशन, नगर परिषद फुलवारी में 2 गाड़ी से 109 वैक्सीनेशन, न्यू कैपिटल अंचल में 6 गाड़ी से मात्र 310 वैक्सीनेशन, पाटलिपुत्रा अंचल में 6 गाड़ी से 320 वैक्सीनेशन और पटना सिटी अंचल में 6 गाड़ी 320 वैक्सीनेशन हुआ।

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