नेपाल की बहू को भागलपुर के युवक से हुआ प्‍यार, पति आया तो प्रेमी पुत्र को लेकर हो गया फरार

ये इश्क हाय…! अंतरजातीय प्रेम विवाह के कारण कुसुम की जिंदगी उलझ सी गई। कुसुम दास ने प्रेम विवाह अंतरजातीय लड़के नेपाल जिला के अरनामा निवासी जितेंद्र यादव से किया। शादी के दस वर्ष बीतने के बाद भी कुसुम को ससुराल वालों ने स्वीकार नहीं किया। कुसुम निश्चित रूप से अपना ठीकाना कहीं नहीं बना पाई। पति नेपाल जिला के सुनसुरी जिला के इनरवा थाना में हवलदार के पद पर कार्य करते थे। कुसुम इधर उधर किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान कुसुम ने पति से विक्रमशिला सेतु गंगा नदी व भागलपुर घूमने की इच्छा व्यक्त किया। पति को छुट्टी नहीं मिली। देवर धमेंद्र कुमार पूर्णिया में नौकरी करता था। पति ने कहा पूर्णिया में धमेंद्र है उसी के साथ भागलपुर घूम आओ। महिला देवर के साथ दिसंबर माह में भागलपुर घूमने आई। भागलपुर घूमने के पश्चात वह बरारी में किराए पर मकान लेकर रहने लगी। एक सप्ताह देवर साथ में रहा। उसके पश्चात देवर भी पूर्णिया चला गया। कुसुम दास अपने पुत्र व पुत्री के साथ बरारी में ही रहने लगी।

बरारी में पास में ही श्रवण मल्लिक रहता था। कुसुम के घर श्रवण की मां बहन का आना जाना था। धीरे धीरे श्रवण भी आने जाने लगा। श्रवण के साथ भी कुसुम की आंखे चार हुई। बरारी में कुसुम व श्रवण का एक साथ रहना मुश्किल होने लगा। श्रवण कुसुम के साथ सहरसा लेकर चला गया। सहरसा में श्रवण ने कुसुम दास से कोर्ट मैरिज शादी किया। इसका शपथ पत्र तैयार किया। वहां छह माह रहने के बाद सहरसा से बरारी आकर किराए के मकान में दोनों साथ रहने लगे। श्रवण की पहली पत्नी को इस संबंध में पता चला तो वह कुसुम लेकर अपने मायके परवत्ता थाना के बहत्तरा आ गई। वहां श्रवण दोनों पत्नीयों के साथ रहता था। श्रवण कुसुम को दूसरी पत्नी मानता था। इसी दौरान श्रवण की पहली पत्नी ने सौत से पीछा छुड़ाने के लिए कुसुम के पहले पति जितेंद्र यादव को फोन कर दिया। जितेंद्र यादव अपने लोगों के साथ राघोपुर आया। जितेंद्र को राघोपुर आने की सूचना पर दबाव बनाने के लिए श्रवण मल्लिक कुसुम के पुत्र को लेकर फरार हो गया। पहला पति जितेंद्र आने पर कुसुम उसके पक्ष में हो गई।

परवत्ता थानाध्यक्ष रामचंद्र यादव ने बताया कि यह अपहरण का मामला हैं नहीं। यह प्रेम प्रसंग का मामला हैं। मामला बरारी थाना का हैं। श्रवण मल्लिक व कुसुम के बीच प्रेम प्रसंग हैं। साथ माह तक दोनों पति पत्नी के रूप में रह रही थी। इतना दिन तक कोई दबाव में नहीं रख सकता हैं। कुसुम ने अपने हाथ से पति के नाम का गोदना मिटवा कर श्रवण का नाम गोदवा लिया था। यह जबरदस्ती नहीं हो सकता हैं। कुसुम कभी भी पुलिस के पास जा सकती थी। अब कुसुम का कहना हैं कि पुत्र की हत्या करने की धमकी देकर यौन शोषण व मेरे साथ शादी किया। वहीं महिला के पति जितेंद्र यादव का कहना हैं कि पुत्र के अपहरण का आवेदन ना तो परवत्ता थाना ले रहा और ना ही बरारी थाना स्वीकार कर रहा हैं। हमें पुत्र चाहिए। यदि हमें पुत्र नहीं मिला तो बीना पुत्र के ही वापस लौटना पड़ेगा। अभी हम राघोपुर में ही हैं।

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