BSF जवान का पार्थिव शरीर बांका पहुंचा, साथ आए कांस्टेबल बोले-घटना कैसे हुई जानकारी नहीं, छोटे भाई ने कहा-मेरे भाई ने सुसाइड नहीं किया

पंजाब के अटारी बॉर्डर के बीओपी धारिवार पोस्ट पर तैनात BSF के जवान चंदन कुमार सिंह (30) की मौत मामले में अलग-अलग तरह की बातें हो रही हैं। रंजीत सिंह का पार्थिव शरीर बांका जिला स्थित पैतृक गांव गुलनी पहुंचा। BSF के कांस्टेबल समीर चक्रवर्ती ने बताया- ‘हमें सिर्फ यह आदेश मिला था कि पटना एयरपोर्ट से चंदन सिंह के पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचा देना है। घटना कैसे हुई क्या हुई यह मुझे जानकारी नहीं है।’

हालांकि, परिजन अभी भी जवान के मुठभेड़ में शहीद होने की बात कह रहे हैं तो दूसरी ओर BSF के पदाधिकारी दूसरे बेहोश जवान के होश में आने का इंतजार कर रहे हैं। जवान चंदन सिंह के छोटे भाई ने कहा-‘मेरे भैया ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि वो मुठभेड़ में शहीद हुए हैं।’ बताते चलें कि मंगलवार की शाम टावर के पास ड्यूटी दे रहे चंदन सिंह की गोली लगने से मौत हो गई। जबकि, टावर पर तैनात जवान बेहोश हो गया।

जवान चंदन सिंह के छोटे भाई साहेब कुमार सिंह ने बताया- ‘दूसरा जवान बेहोश कैसे हुआ, इस बात की जानकारी सीनियर पदाधिकारी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। वे बस इतना ही कह रहे हैं कि उसके होश में आने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।’ साहेब सिंह ने बताया- ‘घटना की सूचना सीनियर द्वारा दी गई थी कि पर घटना कैसे हुई, इस संबंध में सीनियर सही बात नहीं बता रहे हैं। वे बस इतना ही कह रहे हैं कि पोस्टमॉर्टम होने के बाद वहां आएंगे तब बताएंगे कि घटना कैसे हुई है।’ साहेब सिंह ने बताया- ‘अगर भैया चंदन सिंह सुसाइड करते तो गोली सिर में मारते न कि पेट में। वे मुठभेड़ में शहीद हुए हैं। भैया से 5-6 दिन से बात नहीं हो पा रही थी। न तो उनका कॉल आ रहा था और न ही कॉल लग रहा था। उनसे एक सप्ताह पहले बात हुई थी।’ इधर, जवान चंदन सिंह के पार्थिव शरीर के साथ अमृतसर से आए बीएसएफ के पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया- ‘हमें अमृतसर एयरपोर्ट पर पार्थिव सर को सौंपा गया और यह जिम्मेदारी दी गई कि मैं चंदन सिंह सिंह के पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचा दूं। घटना की जानकारी मुझे नहीं है।’

साहेब सिंह ने बताया- ‘चंदन सिंह ने 2012 में BSF ज्वॉइन किया था। वो पहले त्रिपुरा में थे। फिर कोलकाता में, फिर छत्तीसगढ़ गए और अब उनका तबादला पंजाब के अमृतसर में हुआ था। 2014 में उनकी शादी लखीसराय के सत्संडा में हुई थी। उनकी दो संताने हैं। एक पुत्र अंश (4) और पुत्री अंशिका (2)। अंश बचपन से ही मानसिक रूप से बीमार है, जिसका इलाज वैल्लोर में चल रहा है। वो एक माह 12 दिन पहले ही वैल्लोर से आकर अपनी ड्यूटी पर गए थे और फिर एक दो दिन में घर आने वाले थे। फिर घर से अंश को लेकर वैल्लोर जाना था। वैल्लोर से लौटने के बाद अपने परिवार को अमृतसर ले जाने वाले थे।’

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