सुशील मोदी का बड़ा आरोप-लालू जी IAS अधिकारियों से पिकदान उठवाते थे, तेजस्वी यादव भी यही चाहते हैं

बिहार में अफसरशाही के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाने को लेकर पूर्व डीप्टी सीएम व राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने तेजस्वी यादव पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव जो सवाल पूछते हैं, वह जवाब देने योग्य नहीं होता है। वह कहते हैं कि बिहार में अफसरशाही हावि है। लेकिन अपने पिता के कार्यकाल में अफसर कैसे काम करते थे। यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। लालू जी आईएएस अधिकारियों से पिकदान उठवाते थे, खैनी मलवाते थे। तेजस्वी ने यही सब देखा है इसलिए वह शायद ऐसी ही अफसरशाही चाहते है, जिसकी जरुरत बिहार को नहीं है। उक्त बातें भाजपा कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कही।

सुशील मोदी ने कहा देश में अंदर के लिए दलितों के लिए, पिछड़ों के लिए या ऊंची जाति में पिछड़ों के लिए किसी ने कुछ काम किया है तो वह नरेंद्र मोदी की सरकार ने किया है या जिस गठबंधन में बीजेपी रही है उस सरकार ने किया है। राजद-कांग्रेस कभी भी पिछड़ों का विकास नहीं कर सकती है। इस दौरान लालू प्रसाद को पिछड़ों के नेता बताए जाने पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह पिछड़ों के इतने हिमायती थे तो क्यों 23 साल तक बिहार में पंचायत चुनाव नहीं कराया। बाद में चुनाव कराया भी तो एसटी-एसटी तबके के लिए आरक्षण की व्यवस्था नहीं की। जबकि स्पष्ट प्रावधान है कि पिछड़ों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करे। यह हमारी सरकार थी, जिसने बिहार पंचायत चुनाव में पिछड़ों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की, ताकि वह भी समाज में आगे बढ़ सकें। सुशील मोदी ने कहा कि आज 1600 से ज्यादा मुखिया अति पिछड़ा समाज से बने हैं, वह एनडीए सरकार की देन है।

उन्होंने कहा कि आज मेडिकल कॉलेज में ओबीसी कोटा, केंद्रीय विद्यालय मिलिट्री स्कूलों और नवोदय में 27 फीसदी आरक्षण पिछड़ों के लिए आरक्षित किया गया है। जिसके कारण चार लाख पिछड़े वर्ग बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की व्यवस्था नरेंद्र मोदी सरकार ने की। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस से यह जानना चाहता हूं कि उन्होंने क्यों नहीं पिछड़ा वर्ग को सांविधानिक अधिकार दिया, क्यों एसटी आयोग को लागू नहीं किया। जबकि वह खुद को पिछड़ों का हिमायती बताती रही है। इस दौरान लंबे समय तक नीतीश कुमार के साथ काम कर चुके सुशील मोदी से पीएम मेटेरियल पर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली, कहा यह कोई मुद्दा नहीं है।

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