Supriya Sule : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले का लोकसभा में दिया गया एक बयान महाराष्ट्र की राजनीति में दूरगामी असर डालता दिख रहा है। ईवीएम और वीवीपैट पर सवाल उठाने से साफ इनकार करते हुए उन्होंने ऐसा रुख अपनाया, जिसने कांग्रेस को असहज किया। साथ ही उनकी अपनी पार्टी के पिछले स्टैंड को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। सुप्रिया सुले ने संसद में कहा कि वह चार बार चुनाव जीतकर आई हैं और हर बार चुनाव ईवीएम के जरिए ही हुआ है। इसलिए वह इस व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाएंगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल लगातार ईवीएम पर अविश्वास जताते रहे हैं। चुनावी हार के बाद इसे मुद्दा बनाते रहे हैं।
सुप्रिया सुले का यह रुख इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि उनकी ही पार्टी के एक विधायक पहले ईवीएम के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा कर चुके हैं। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मालशिरस सीट से जीतने वाले विधायक उत्तमराव जानकर ने अपने क्षेत्र में मतपत्रों से पुनर्मतदान की मांग को लेकर अभियान चलाया था।
Supriya Sule: मार्कड़वाड़ी का विवादित पुनर्मतदान
जानकर ने मुख्यमंत्री के शपथग्रहण से ठीक 2 दिन पहले अपने गांव मार्कड़वाड़ी में मतपत्रों के जरिए पुनः मतदान करवा दिया था। हालांकि प्रशासन ने इसे अवैध बताते हुए रद्द कर दिया और आयोजकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। जानकर ने ईवीएम में गड़बड़ी का दावा करते हुए करीब 1 लाख 76 हजार मतदाताओं के शपथपत्र भी पेश किए थे। इस आंदोलन को उस वक्त और बल मिला, जब पार्टी अध्यक्ष शरद पवार स्वयं तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के साथ मार्कड़वाड़ी पहुंचे। वहां उन्होंने मतपत्रों से चुनाव की पहल को सही दिशा में कदम बताया और ईवीएम से मिलने वाले परिणामों को अप्रत्याशित करार दिया था। उन्होंने मतदान प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत तक जता दी थी।
सार्वजनिक टिप्पणी नहीं आई
उस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुप्रिया सुले की ओर से कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं आई थी। अब जब उन्होंने खुले तौर पर ईवीएम के समर्थन जैसा रुख अपनाया है, तो सवाल उठ रहा है कि पार्टी के भीतर दो अलग-अलग विचारधाराएं क्यों दिख रही हैं। महाराष्ट्र में राकांपा के सहयोगी दल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) लंबे समय से ईवीएम पर सवाल उठाते आए हैं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह मुद्दा और तेज हुआ। अब 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव सामने हैं। ऐसे में सुप्रिया सुले का बयान इन दलों की रणनीति को कमजोर करता नजर आ रहा है।
उद्धव ठाकरे की लाइन से अलग सुर
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे भी राहुल गांधी के साथ मतचोरी और ईवीएम विरोध की बात करते रहे हैं। सुप्रिया सुले का ताजा रुख इस साझा विपक्षी लाइन से अलग दिखाई देता है, जिससे महाविकास आघाड़ी के भीतर मतभेद और गहरे होने की आशंका बढ़ गई है। महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति में नई दरार, नई बहस और आने वाले चुनावों से पहले नई रणनीतियों का संकेत भी देता है।
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