Summer Sleep Problem : जैसे-जैसे मौसम बदलता है, वैसे-वैसे लोगों की दिनचर्या और शरीर की लय भी बदलने लगती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मियों में अक्सर लोग सर्दियों के मुकाबले कम सोते हैं। इसका असर धीरे-धीरे उनकी सेहत और कामकाज पर दिखने लगता है। कई लोग सुबह उठते ही थकान महसूस करते हैं या पूरे दिन सुस्ती बनी रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए रोजाना करीब सात से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है।
गर्मी के मौसम में दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती हैं। यही कारण है कि शरीर का प्राकृतिक स्लीप साइकल थोड़ा बदल जाता है। शरीर में नींद लाने वाले हार्मोन Melatonin का उत्पादन अंधेरा होने के बाद बढ़ता है।
Summer Sleep Problem
चूंकि, गर्मियों में अंधेरा देर से होता है, इसलिए यह हार्मोन भी देर से सक्रिय होता है। इसी वजह से कई लोगों को देर रात तक नींद नहीं आती और नींद का समय कम हो जाता है। नींद पर हुए कई शोध बताते हैं कि इंसान का शरीर एक जैविक घड़ी के हिसाब से चलता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में Circadian Rhythm कहा जाता है। यह घड़ी सूरज के उगने और ढलने के समय से जुड़ी होती है। जब दिन का समय बढ़ता है तो यह घड़ी भी उसी हिसाब से थोड़ी बदल जाती है, जिससे सोने-जागने का समय प्रभावित होता है। कई मामलों में लोगों को काम में मन नहीं लगता और ऊर्जा का स्तर भी कम हो जाता है।
जब लगातार कई दिनों तक पर्याप्त नींद नहीं मिलती तो इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कम नींद लेने से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
अपनाएं ये आदतें
- रोजाना सुबह प्राकृतिक धूप लेना और हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियां करना शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखने में मदद करता है।
- इसके अलावा सोने और जागने का समय तय रखना भी जरूरी है।
- रात में अच्छी नींद के लिए सोने से पहले चाय-कॉफी जैसे पेय पदार्थों से बचना चाहिए।
- कमरे का वातावरण ठंडा, शांत और हल्का अंधेरा होना चाहिए।
- विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए, क्योंकि इनकी रोशनी नींद को प्रभावित करती है।
बदलती लाइफस्टाइल
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोगों की दिनचर्या अनियमित हो गई है। देर रात तक काम करना, मोबाइल पर समय बिताना और सुबह जल्दी उठना भी नींद की कमी का कारण बन जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर दिन की गतिविधियां संतुलित रहें और शरीर को पर्याप्त आराम मिले तो रात की नींद भी बेहतर हो सकती है।
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