Special Situation Investing : स्पेशल सिचुएशन इन्वेस्टिंग पारंपरिक निवेश से अलग सोच रखती है। इसमें कंपनी के रोजमर्रा के बिजनेस प्रदर्शन से ज्यादा उन खास हालातों पर ध्यान दिया जाता है, जो किसी बड़े कॉर्पोरेट या आर्थिक बदलाव से पैदा होते हैं। जब किसी कंपनी में मर्जर, डीमर्जर, रीस्ट्रक्चरिंग या कैपिटल जुटाने जैसे अहम फैसले होते हैं, तो बाजार में अस्थायी भ्रम और उतार-चढ़ाव पैदा हो जाता है। यही वह समय होता है, जब समझदार निवेशक छिपे हुए अवसर पहचान सकते हैं।
अक्सर देखा गया है कि किसी सेक्टर में मंदी, रेगुलेटरी सख्ती या इंडस्ट्री से जुड़ी चुनौतियां आती हैं, तो निवेशक घबराकर जल्दबाजी में शेयर बेचने लगते हैं। इस जल्दबाजी में कई बार मजबूत कंपनियों के शेयर भी कम कीमत पर मिलने लगते हैं।
Special Situation Investing
स्पेशल सिचुएशन इन्वेस्टिंग का मकसद इसी गलत प्राइसिंग को पहचानना और यह आंकलन करना होता है कि कंपनी लंबे समय में इन मुश्किलों से उबर पाएगी या नहीं। मर्जर और एक्विजिशन, शेयर बायबैक, स्पिन-ऑफ, डीमर्जर, डिलिस्टिंग या बैलेंस शीट सुधार जैसे कॉर्पोरेट इवेंट्स निवेशकों के लिए नए दरवाजे खोलते हैं। उदाहरण के लिए, जब किसी बड़े ग्रुप की एक यूनिट को अलग कंपनी के रूप में लिस्ट किया जाता है, तो दोनों कंपनियों का स्वतंत्र मूल्यांकन होता है। इससे कई बार निवेशकों को कम कीमत पर अच्छे शेयर हासिल करने का अवसर मिल जाता है।
बाजार की जल्दबाजी
पॉलिसी में बदलाव, लिक्विडिटी की कमी, वैश्विक तनाव या भू-राजनीतिक घटनाएं भी बाजार में अचानक गिरावट ला सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक भावनाओं में बहकर फैसले लेते हैं। स्पेशल सिचुएशन इन्वेस्टिंग का सिद्धांत इससे अलग है। दरअसल, यह शॉर्ट-टर्म प्राइस मूवमेंट के बजाय कंपनी की असली ताकत और भविष्य की क्षमता पर फोकस करता है।
रिस्क मैनेजमेंट अहम
यह जरूरी नहीं कि हर स्पेशल सिचुएशन निवेश सफल ही हो। कुछ मामलों में नतीजे उम्मीद से बेहतर निकलते हैं, कुछ में समय ज्यादा लगता है और कुछ पूरी तरह असफल भी हो सकते हैं। इसलिए इस रणनीति में गहरी रिसर्च, अनुशासित निवेश, सही पोजीशन साइज और समय पर एग्जिट बेहद जरूरी माने जाते हैं। स्पेशल सिचुएशन अप्रोच का एक चर्चित उदाहरण ICICI Prudential India Opportunities Fund है, जिसने बीते वर्षों में उभरते अवसरों का फायदा उठाकर निवेशकों के लिए मजबूत रिटर्न दिए हैं। दिसंबर 2025 तक इस फंड ने तीन साल में करीब 23% से अधिक, पांच साल में 27% से ज्यादा और शुरुआत से अब तक 21% से अधिक का सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट दर्ज किया है।
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