SIR In CG : कोंटा विधानसभा में मतदाता सूची से जुड़ा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सर्वे 18 दिसंबर तक पूरा कर लिया गया है। अब सर्वे से निकले आंकड़ों पर अंतिम फैसला होना बाकी है। प्रशासनिक स्तर पर अगर इन आंकड़ों को हरी झंडी मिलती है, तो कोंटा विधानसभा की चुनावी जमीन पूरी तरह बदल सकती है। हजारों मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 1 लाख 85 हजार बताई जा रही है।
SIR सर्वे के दौरान सामने आया कि इनमें से करीब 33 हजार 500 से ज्यादा मतदाता ऐसे हैं, जो या तो अपने पते पर नहीं मिले या फिर उनके स्थानांतरण और मृत्यु की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में इन्हें सीधे ड्रॉप सूची में डालने की तैयारी मानी जा रही है, जिससे इनके नाम कटने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है।
SIR In CG: मांगा जाएगा जवाब
सर्वे में एक दूसरा बड़ा आंकड़ा भी सामने आया है। लगभग 6,500 से ज्यादा ऐसे मतदाता पाए गए हैं, जो घरों पर मौजूद नहीं थे, लेकिन पूरी तरह से बाहर भी नहीं किए गए हैं। इन लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे और उनसे जवाब मांगा जाएगा। अगर वे तय 12 दस्तावेजों में से कोई एक भी प्रमाण प्रस्तुत कर देते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची में बरकरार रह सकता है।
प्रशासन के मुताबिक, 23 दिसंबर को प्रारंभिक सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 22 जनवरी तक दावा और आपत्तियां ली जाएंगी। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी को जारी होने की संभावना है। इस बीच नागरिक प्रशासन की वेबसाइट पर ड्राफ्ट सूची जारी की जाएगी, जहां लोग अपना नाम खुद भी जांच सकेंगे।
दोरनापाल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
SIR सर्वे में सबसे ज्यादा असर दोरनापाल सेक्टर में देखने को मिला है। दोरनापाल से लेकर जगरगुड़ा तक के इलाकों में बड़ी संख्या में नाम कटने की आशंका जताई जा रही है। इसकी जड़ें साल 2005 के सल्वा जुडूम आंदोलन से जुड़ी मानी जा रही हैं, जब बड़ी संख्या में लोग जान बचाकर दूसरे राज्यों में जाकर बस गए थे। सर्वे के दौरान यह भी सामने आया कि कई परिवार आज भी वापस नहीं लौटे हैं, जबकि कुछ लोग उस दौर की हिंसा में मारे गए थे। उस समय का सर्वे ठीक से न हो पाने का असर अब मतदाता सूची में साफ दिख रहा है। दोरनापाल के अलावा कोंटा सेक्टर में करीब 6 हजार, सुकमा और छिन्दगढ़ में 5-5 हजार नाम कटने की आशंका जताई जा रही है।
सीमावर्ती इलाकों की परेशानी
उड़ीसा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से सटे इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को SIR सर्वे में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई परिवारों की रिश्तेदारी इन राज्यों में है। शादी के बाद आई महिलाएं या बाहर से आकर बसे लोग 2003 से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उनका नाम खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती-किसानी के इस मौसम में दस्तावेज जुटाना आसान नहीं है। इसलिए समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हजारों लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
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