Shahrukh Khan : आईपीएल नीलामी में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को केकेआर द्वारा खरीदे जाने के बाद राजनीति गरमा गई है। टीम के मालिक शाहरुख खान के फैसले को लेकर अलग-अलग संगठनों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। खेल के मैदान से निकला यह मामला अब सियासी और वैचारिक बहस में बदल चुका है। हरिद्वार में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता संगीत सोम ने शाहरुख खान पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आईपीएल खरीद को देशहित से जोड़ते हुए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
विवाद उस वक्त और भड़क गया जब हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर ने शाहरुख खान को लेकर आपत्तिजनक और भड़काऊ घोषणा कर दी। उन्होंने सार्वजनिक मंच से अभिनेता की जुबान काटने पर एक लाख रुपये के इनाम की बात कही। इस बयान की निंदा हो रही है।
Shahrukh Khan को देश से बाहर भेजने की मांग
इसी कड़ी में दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर शाहरुख खान को बांग्लादेश भेजने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बावजूद खिलाड़ी को खरीदना गलत संदेश देता है। पत्र में संपत्ति जब्ती जैसी मांगें भी रखी गईं, जिसने विवाद को और तीखा कर दिया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और खेल को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। साथ ही यह भी जोड़ा कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को अपने देश में हिंदुओं की सुरक्षा के मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए।
समर्थन में मुस्लिम धर्मगुरु
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी शाहरुख खान के बचाव में सामने आए। उन्होंने कहा कि अभिनेता का मकसद गलत नहीं है और उन्हें गद्दार या आतंकी कहना शर्मनाक है। मौलाना ने यह भी कहा कि बांग्लादेश भारत का मित्र देश है और खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। इस विवाद ने एक बार फिर खेल और राजनीति के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक पक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रहा है, वहीं दूसरा पक्ष खेल को खेल की तरह देखने की बात कर रहा है।
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