रामविलास का पुराना पत्र लेकर सामने आए चिराग के करीबी सौरभ पांडेय, पारस खेमे को खूब सुनाया

इस वक्त राजनीतिक गलियारे से बड़ी खबर सामने आ रही है। एलजेपी में जारी सियासी विवाद खत्म नहीं हो रहा है। चिराग पासवान और चाचा पशुपति पारस खेमा पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। चाचा पारस ने जब चिराग पासवान से अलग होने का फैसला लिया तो इसका सबसे बड़ा कारण चिराग के करीबी और उनके सियासी रणनीतिकार सौरभ पांडेय को बताया गया है। पारस खेमे के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सौरभ पांडेय के कारण चिराग से अलग होने का फैसला लिया गया है। पारस खेमा ने सौरभ पांडेय का नाम लेकर ही हमेशा चिराग पासवान पर हमला बोला है। अब सौरभ पांडेय ने भी अपनी चुप्पी तोड़ दी है। इस मामले को लेकर सौरभ पांडेय पहली बार ट्विटर पर एक्टिव हुए और उन्होंने स्व. रामविलास पासवान की एक पुरानी चिट्ठी को साझा किया है।

सौरभ पांडेय ने ट्विटर पर लिखा है-जिसने मेहनत देखी अब वह हैं नहीं। जिसने पार्टी को आगे बढ़ाने की जिद देखी है, अब वह हैं नहीं.. आइए हम सब चिराग के नेतृत्व में चलें। दरअसल रामविलास पासवान का वह पत्र 1 जनवरी 2020 का है, जो रामविलास पासवान ने सौरभ पांडेय को लिखा था। इस पत्र में रामविलास पासवान ने चिराग की राजनीतिक उपलब्धि के लिए सौरभ की जमकर सराहना की थी।  उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि तुमलोगों के सहयोग से चिराग सांसद, राष्ट्रीय अध्यक्ष और सदन में नेता हैं। आज देश के बड़े लोगों में चिराग का नाम है। साल 2013 में चिराग राजनीति में आया और कम समय में शिखर पर पहुंच गया। रामविलास पासवान के खत में लिखा गया है कि तुम दोनों ने पिछले कुछ साल में काफी मेहनत की है। यह उसी का परिणाम है, लेकिन सौरव मंजिल अभी दूर है। जो लक्ष्य है पहला बिहार और फिर देश। दरअसल रामविलास पासवान के इस पुराने खत के जरिए सौरव ना केवल पारस गुट को जवाब दे रहे हैं बल्कि अभी बता रहे हैं कि पार्टी का भविष्य केवल चिराग के साथ हैं।

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