Sabarimala Temple : देश की सर्वोच्च अदालत एक बार फिर Sabarimala Temple में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश से जुड़े फैसले पर सुनवाई करने जा रही है। 2018 के ऐतिहासिक निर्णय के खिलाफ दायर 67 पुनर्विचार याचिकाओं पर आज विचार होगा। यह मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं, बल्कि समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं की संवैधानिक वैधता जैसे बड़े सवालों से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अगुवाई में तीन सदस्यीय पीठ इस बात की जांच करेगी कि क्या मामले को विस्तृत संवैधानिक पीठ को भेजा जाए। अदालत बराबरी के अधिकार, आस्था की स्वतंत्रता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक दखल की सीमा जैसे बिंदुओं पर विचार कर सकती है।
Sabarimala Temple पर फिर सुप्रीम सुनवाई
सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट नौ जजों की नई बेंच गठित करने पर भी निर्देश दे सकता है, क्योंकि 2019 में बनी पिछली संविधान पीठ के अधिकांश सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि नौ जजों की पीठ गठित होती है तो उसका दायरा सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं रहेगा। मुस्लिम और पारसी समुदायों में महिलाओं के धार्मिक अधिकारों से जुड़े प्रश्नों पर भी व्यापक बहस हो सकती है। अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि धार्मिक आस्थाओं और लैंगिक समानता के टकराव में संविधान की प्राथमिकता किस हद तक लागू होगी।
चुनाव से पहले केरल सरकार की मुश्किल
इस साल Kerala में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan की सरकार पहले महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में खुलकर खड़ी रही है। 2019 में अदालत के आदेश के बाद महिलाओं को मंदिर तक पहुंचाने के लिए पुलिस सुरक्षा भी दी गई थी। सरकार ने ‘नवोद्धानम’ अभियान और ‘विमेंस वॉल’ जैसी पहलों के जरिए इसे सामाजिक सुधार की दिशा में कदम बताया था।
फैसले पर टिकीं निगाहें
आज की सुनवाई से यह संकेत मिल सकता है कि मामला फिर से बड़ी संवैधानिक बहस की ओर बढ़ेगा या नहीं। अदालत का रुख न केवल केरल की राजनीति बल्कि देशभर में धार्मिक परंपराओं और महिलाओं के अधिकारों पर चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल, सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली टिप्पणी पर टिकी है।
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