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Republic Day Special: भारत में युवा राजनीति से दूर क्यों? लोकतंत्र के भविष्य पर उठते सवाल

Republic Day Special
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Republic Day Special : हर साल Republic Day पर हम लोकतंत्र, संविधान और देश के उज्ज्वल भविष्य की बात करते हैं। मंचों से यह दोहराया जाता है कि युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। लेकिन हकीकत यह है कि राजनीति में युवाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है। सवाल उठता है कि अगर युवा देश की धड़कन हैं, तो सत्ता और नीति निर्माण में उनकी मौजूदगी इतनी सीमित क्यों है?

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है, लेकिन राजनीतिक मंचों पर आज भी वही पुराने चेहरे और पारंपरिक सोच हावी हैं। नई पीढ़ी आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह राजनीति चाहती है, जबकि मौजूदा सिस्टम अक्सर बदलाव के लिए तैयार नजर नहीं आता। यही कारण है कि कई युवा खुद को इस ढांचे से अलग महसूस करते हैं।

Republic Day Special: भारत में युवा राजनीति से दूर क्यों?

युवाओं के राजनीति से दूर रहने की एक बड़ी वजह व्यवस्था पर भरोसे की कमी है। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, सत्ता की खींचतान और नकारात्मक राजनीति की छवि ने युवाओं के मन में राजनीति के प्रति डर और निराशा पैदा की है। कई युवाओं को लगता है कि इस क्षेत्र में कदम रखना अपने मूल्यों से समझौता करने जैसा है। आज का युवा सिर्फ सपने नहीं देखता, बल्कि जिम्मेदारियों का बोझ भी उठाता है। रोजगार की तलाश, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, परिवार की अपेक्षाएं और आर्थिक सुरक्षा की चिंता इन सबके बीच राजनीति को प्राथमिकता देना आसान नहीं है। कई युवाओं को डर रहता है कि राजनीतिक सक्रियता उनके करियर को प्रभावित कर सकती है।

राजनीतिक जागरूकता की कमी

स्कूल और कॉलेज में संविधान और लोकतंत्र की पढ़ाई अक्सर किताबी बनकर रह जाती है। व्यावहारिक राजनीतिक समझ, नेतृत्व विकास और सामाजिक भागीदारी को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता। नतीजतन, युवा राजनीति को समझने के बजाय उससे दूरी बना लेते हैं। आज का युवा सोशल मीडिया पर मुखर है कि मुद्दों पर पोस्ट करता है, बहस करता है और ट्रेंड चलाता है। लेकिन डिजिटल एक्टिविज्म और ज़मीनी राजनीति के बीच बड़ा अंतर है। असली बदलाव के लिए मैदान में उतरना, संगठन बनाना और लंबा संघर्ष करना जरूरी होता है, जो कम ही युवा कर पाते हैं।

राजनीतिक दलों में अवसरों की कमी

अधिकांश राजनीतिक दल युवाओं का उपयोग प्रचार, भीड़ और सोशल मीडिया के लिए तो करते हैं, लेकिन उन्हें निर्णय लेने या नेतृत्व का वास्तविक अवसर कम देते हैं। टिकट वितरण और नीति निर्धारण में वरिष्ठ नेताओं का वर्चस्व युवाओं को हाशिए पर धकेल देता है। Republic Day सिर्फ उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। अगर युवा राजनीति से दूर रहेगा, तो फैसले वही लोग लेते रहेंगे जो दशकों से सत्ता में हैं। बदलाव की रफ्तार धीमी रहेगी और भविष्य पुराने नजरियों से तय होता रहेगा।

सिस्टम से निराश

अगर शिक्षा, राजनीतिक दल और समाज मिलकर युवाओं को अवसर, सुरक्षा और विश्वास दें, तो वे न केवल राजनीति में आगे आएंगे, बल्कि लोकतंत्र को नई ऊर्जा भी देंगे। इस Republic Day पर सवाल यही है कि क्या युवा सिर्फ भविष्य बनेगा, या वर्तमान भी बदलेगा?

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