अगर आप भी चाहते हैं की मां लक्ष्मी आपके पास करें देवी रुक्मणी को समर्पित यह आठ छंदों का स्रोत जो कि आपका मन को शांत करेगा और आपके जीवन में सौभाग्य और प्रेम का संचार बनाए रखेगा। इन छंदों का पाठ करना चाहिए। मान्यता है की देवी रुक्मणी साक्षात महालक्ष्मी का अवतार है। अगर आप उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको इस दिव्य स्त्रोत का पाठ करना होगा।
स्रोत का पाठ करने के लाभ
अगर आप इस दिव्य अष्टकम स्तोत्र का पाठ करते हैं तो आपके जीवन में कई बदलाव देखने को मिलेंगे इसके कई लाभ है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण की प्रधान रानी और द्वारका की महारानी रुक्मिणी देवी व्यक्तित्व प्रेम और समर्पण के साथ धैर्य की मिसाल मानी जाती है। अगर आप उनकी कृपा पाना चाहते हैं तो आपको इस “श्री रुक्मणी अष्टम” का पाठ करना होगा। इसका पाठ करने से जीवन में सब कुछ शुभ होता है।
श्री रुक्मिणी अष्टकम
नमस्ते भीष्मकसुते वासुदेवविलासिनि ,
प्रद्युम्नाम्ब नमस्तुभ्यं प्रसीद परमेश्वरि।
नमः कमलमालिन्यै कमले कमलालये,
जगन्मातर्नमस्तुभ्यं कृष्णप्राणाधिकप्रिये।
जानकी त्वं च लक्ष्मीस्त्वं विष्णुवक्षःस्थलस्थिता,
वैकुण्ठपुरसाम्राज्ञी त्वं भक्ताभीष्टदायिनी।
स्वर्णवर्णे रमे रम्ये सौन्दर्याकररूपिणि,
मारमातर्महालक्ष्मि कृष्णकन्दर्पवर्धिनि।
वर्धिनी सुभगानां च वर्षिणी सर्वसम्पदाम् ,
नारायणाङ्घ्रियुग्मे त्वं नित्यदास्यप्रदायिनी।
गोविन्दपट्टमहिषि द्वारकापुरनायिके,
शरण्ये वत्सले सौम्ये भीमातीरनिवासिनि।
त्वदन्या का गतिर्मातरगतीनां जगत्त्रये,
कृष्णकारुण्यरूपा त्वं तत्क्षान्तिपरिवर्धिनी।
कृष्णे त्वयि च हे मातर्दृढा भक्तिः सदाऽस्तु नः,
जयोऽस्तु जय वैदर्भि रुक्मिण्यम्ब जयोऽस्तु ते।
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