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चैत्र नवरात्रि के नौवे दिन करें इस चालीसा का पाठ, मां सिद्धिदात्री होंगी प्रसन्न

Chaitra Navratri 2026:- चैत्र नवरात्रि के 9वे दिन मां सिद्धिदात्री को पूजा जाता है। चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। इस दिन मां दुर्गा के नवे स्वरूप का पूजन किया जाता है। अगर आप भी समस्त सिद्धियों की प्राप्ति करना चाहते हैं तो आपको इस दौरान मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना करनी चाहिए। चैत्र नवरात्र का पावन उत्सव अपने अंतिम पड़ाव यानी की महान के दिन अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा के 9वे स्वरूप के रूप में यानी की मां सिद्धिदात्री को समर्पित की गई है।

महानवमी पर क्या करें?

मान्यता है कि 9 दिनों की कठिन तपस्या और साधना का पूरा फल नवमी की पूजा करने से प्राप्त होता है। मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने से भक्तों को केवल सिद्धियां ही प्राप्त नहीं होती बल्कि इससे भक्तों के जीवन से भय और अज्ञानता हमेशा के लिए दूर हो जाती है। महानवमी की पूजा के दौरान मां सिद्धिदात्री के चालीसा का पाठ करने से अत्यंत फलदाई और चमत्कारी फल प्राप्त होता है। मां सिद्धिदात्री सुख समृद्धि और मोक्ष का आशीर्वाद देती है।

सिद्धिदात्री चालीसा

दोहा

नवरात्रि में नवमी दिन, जो सिद्धिदात्री की साध।

उनका कार्य सिद्ध हो, मिट जाए सब बाध॥

चौपाई

जय सिद्धिदात्री जगदंबा, सिद्धि का दान देने वाली।

जो भी करे विनती तेरी, उसकी हर मनोकामना पूरी वाली॥

शक्ति स्वरूपिणी माँ अम्बे, जो भी सुमिरे तुझको।

कष्ट हरती, दीनों पर कृपा करती, तेरी महिमा असीम है माँ॥

चारों दिशाओं में तेरी महिमा, तुझसे बढ़कर कोई नहीं।

त्रिदेव भी तेरे आगे नतमस्तक, तेरा वरदान सभी माँगे॥

जो सच्चे मन से भजे तुझको, उसके संकट दूर हो जाए।

धन-धान्य की हो प्राप्ति, जीवन में मंगल हो जाए॥

सिद्धिदात्री माँ जगदंबे, तेरे चरणों में शीश नवाए।

तू ही शक्ति, तू ही ममता, जग में तेरा ही गुण गाए॥

सिद्धियों की दात्री माँ तू, तुझसे बड़ा कोई नहीं।

तेरी महिमा अपरंपार है, तेरा ही गुणगान सभी करते॥

जो भी करे ध्यान तेरा, वह भवसागर से तर जाए।

तेरा स्मरण करते ही माँ, सब दुःख दर्द दूर हो जाए॥

भक्तों की रक्षा करने वाली, तू है जगत की पालनहार।

तेरी महिमा गाते गाते, हम भी हो जाएँ तुझपर निसार॥

नवदुर्गा में तेरा स्थान, तुझसे ही है सबका उद्धार।

सिद्धिदात्री मां तू है जग की, तेरा ही भजते बारम्बार॥

मां सिद्धिदात्री की महिमा, कोई कह न पाए।

जो भी हो तेरे ध्यान में लीन, वह सब संकट से छूट जाए॥

सर्व सिद्धियों की दात्री मा, तेरे चरणों में शीश नवाए।

जो तेरा स्मरण करते, वे भवसागर से पार हो जाए॥

दोहा

मां सिद्धिदात्री का जो भी ध्यान करे सुमिरन।

उसके सब कष्ट कट जाएं, हो उसका मंगल सदा॥

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